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सर्वकोश
अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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पृष्ठ 67

स्वयंबोध अमनस्कयोग१
अमनस्कखण्ड२
प्रथमाध्याय३
कैलासशिखरासीनं सर्वज्ञं सर्वगं शिवम्४।
वामदेवो मुनिश्रेष्ठः प्रणम्य परिपृच्छति ॥ १ ॥
मुनिश्रेष्ठ वामदेव जी ने कैलास पर्वत के शिखर पर बैठे हुए सर्वज्ञ सर्व-
व्यापी भगवान् शिवजी को प्रणाम कर पूछा ॥ १ ॥
वामदेव उवाच-
देवदेव महादेव सर्वानुग्रहकारक५ ।
जीवन्मुक्तिप्रदोपायं कथयस्व मम प्रभो ॥ २ ॥
वामदेव जी ने कहा—सब पर अनुग्रह करनेवाले देवाधिदेव हे महादेव
जी ! हे प्रभो ! जीवन्मुक्ति प्रदान करनेवाला उपाय मुझसे कहने की कृपा
कीजिये ॥ २ ॥
१. (ख) अमनस्क योगशास्त्र । २. (ख) नहीं है । ३. (ख) नहीं
है । ४. (ख) नहीं है । ५. (ख) प्रणम्य शिरसा देवं कृतांजलिरुमापतिम् ।
जीवन्मुक्तिप्रदोपायं कथयस्वेति पृच्छति ।