अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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प्रकाशित करायी थी, उसे उन्होंने अपनी पुस्तक पुरातत्त्व निबंधा-
वली³ में भी प्रकट किया । इन दोनों चित्रावलियों में उनका क्रमिक
स्थान नौवां है । मत्स्येन्द्रनाथ का नाम भी पर्याप्त प्रसिद्ध है । मत्स्येन्द्र-
नाथ गोरखनाथ के गुरु रूप में प्रसिद्ध हैं । प्राचीन ग्रन्थों में प्रायः
दोनों महापुरुषों के नाम साथ-साथ स्मरण किये गये हैं । महार्णव-
तन्त्र,⁴ सुधाकरचंद्रिका,⁵ कौलावलीतन्त्र,⁶ श्यामारहस्य⁷ में इन
दोनों महासिद्धों का उल्लेख मिलता है । मत्स्येन्द्रनाथ और गोरक्ष-
नाथ की गणना मानवगुरुओं में की गयी है । ये दोनों ही महासिद्ध
योगिराज और नाथाचार्य माने गये हैं । विभिन्न प्राचीन ग्रन्थों में
मत्स्येन्द्रनाथ के नाम के विभिन्न रूपान्तर मिलते हैं :--
मत्स्येन्द्रनाथ—( महार्णवतंत्र, योगिसंप्रदायाविष्कृति, सुधाकर-
चंद्रिका )
मीन, मीनो—( विभिन्न तंत्र ग्रन्थ, श्यामारहस्य, वर्णरत्नाकर ।)
मीनपा, मीनपाद—( सस्क्य विहार की सूची, कौलज्ञाननिर्णय,
अकुलवीर तन्त्र )
मत्स्येन्द्रनाथ—(योगविषय-सिद्धसिद्धांतपद्धति ऐंड अदर वर्क्स) ।
मच्छघ्नपाद, मच्छेन्द्रपाद, मत्स्येन्द्रपाद्—( कौलज्ञाननिर्णय ) ।
मच्छेन्दपाद्—( अकुलवीर तंत्र, बी. ) ।
मत्स्येन्द्र—( कुलानंद, हठयोगप्रदीपिका ) ।
मच्छिन्द्रनाथपाद--( ज्ञानकारिका ) ।
मच्छन्द--( तन्त्रालोक--अभिनवगुप्त रचित ) ।
इसी प्रकार गोरखनाथ के भी नाम के विविध रूपान्तर हैं--
गोरक्ष—(हठयोगप्रदीपिका, विभिन्न तन्त्र, श्यामारहस्य ) ।
गोरक्षनाथ—(महार्णवतंत्र, योगिसम्प्रदायाविष्कृति, सिद्धसिद्धांत-
पद्धति, अमरौघप्रबोध, योगमार्त्तण्ड ) ।
३. पृ० १४४-ग, इंडियन प्रेस लि०, प्रयाग, १६३७ ।
४, ५, ६, ७-नाथ सम्प्रदाय-डा० ह० प्र० द्विवेदी, पृ० २४, ७६, २४ ।