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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 571

६ आल्हखण्ड । ५७०
भाला मारा इकइन्ताके भाग्यौ तुरत पछाराखाय ४५
खेत छूटिगा तब चौंड़ा ते आल्हा कूच दीन करवाय ॥
डोला पहुँचा बरइन पुरवा बेला बोली बैन सुनाय ४६
नगर मोहोबा का याही है 'साँची कहौ बनाफरराय ॥
नगर मोहोवे का पुरवा यह बेला रानी परै दिखाय ४७
खबरि पायकै सुखिया बारिनि तहँ पर गई तड़ाका आय ॥
संग सहेलिन को लैके सो परछन कीन तहाँपर जाय ४८
चलिभा डोला फिरि आगे को मालिनि पुरै पहुँचा आय ॥
खबरि पायकै फुलियामालिनि सोऊ चली तड़ाका धाय ४९-
संग सहेलिन को लीन्हे सो डोला पास पहुँची आय ॥
कीनि आरती सो बेला की देखिकै रूप गई सन्नाय ५०
हाय ! विधाता यह का कीन्ही सुरपुर पती दीन पठवाय ॥
इतना कहिकै फुलियामालिनि दाँते अँगुरी लीन चपाय ५१
सुनिकै बातैं ये फुलिया की बेला गयो क्रोध उरछाय ॥
हुकुम लगायो इक चाकर को जूतिन देवो मूड ठठाय ५२
हुकुम पायकै सो बेला को मारन लाग तड़ाका धाय ॥
आल्हा बोले तब बेला ते यहनहिंतुम्हहिंमुनासिवआय ५३
अवै न डोला गा मोहबे का रैयानि प्रथम रहिउ पिटवाय ॥
सुनिकै बातैं ये आल्हा की बेला तुरत दीन छुड़वाय ५४
मालिनि पुरवा ते डोला चलि पहुँचा नगर मोहोबे आय ॥
खबरि पायकै बारह रानी मल्हनामहलगई सबधाय ५५
द्यावलि सुनवाँ फुलवा मल्हना द्वारे सबै पहुँची आय ॥
कीन आरती तहँ बेला की सबहिनदुःख शोकविसराय ५६
संगै लैके फिरि बेला का महलन गई तड़ाका आय ॥