सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 511, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 511

१८ आल्हखण्ड । ५१०
कही वीरता लखराना की ब्रह्मा बार बार तहँ गाय १८७
चन्दन बगिया डेरा परिगा पिरथी कूच दीन करवाय ॥
इतना सुनिकै रानी मल्हना तुरतै दीन्ह्यो हुकुम लगाय १८८
सजो मोहोबा चौगिर्दा ते हाटक नये करौ तय्यार ॥
हुकुम पायकै महरानी का मोहबा सजन लाग त्यहिवार १८६
पुती दिवालैं गईं केसरि ते चम्चम् चमकिकरहि जाँयँ ॥
द्वार द्वार में बन्दन वारे घरघर रहे पताका छाय १६०
को गति बरणै पुरवासिन कै द्वारे कलश दीन धरवाय ॥
घृतसों पूरित दीपक वारे सुन्दरि गीत रहीं सब गाय १६१
सजीं बाजारें गलियारन मा माली बैठ ठट्ट के ठट्ट ॥
चलैं कदमपर कहूँ कहूँ घोड़ा कहूँ कहूँ चलैं चाल सरपट्ट १६२
ठट्ट लागि गे तम्बोलिन के जाहिर पान मोहोवे क्यार ॥
सतर सराफाकी बैठी है सोहैं भाँति भाँतिके हार १६३
कौन बजाजा कै गति बरणै भाला वरछिन केरि बजार ॥
गमला बिरखन के गलियनमा जिनमा कोटि वृक्षरुहदार १६४
फूले बेला अलबेला कहूँ मेला लाग चमेलिन क्यार ॥
रेला आवै कहूँ नारिन के गावैं गीत मंगलाचार १६५
बारह रानी चंदेले की तिनके महल सजे त्यहिवार ॥
घरे खिलौना हैं ताखन मा पाखनवेलि बूट अधिकार १६६
सोने चांदी के जेवर को रानी करता फिरैं झनकार ॥
को गति बरणै महरानिन कै सोलो कीन तहाँ श्रृंगार १६७
हाट बाट चौहाटा सजिगे बोले तबै रजा परिमाल ॥
चलिकै लइये जगनायक जी बेटा रतीभानको लाल १६८
इतना कहिकै परिमालिक जी पलकी ऊपर भये असवार ॥