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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 505

१२ आल्हाखण्ड । ५०४
सुनिकै बातें ये माहिल की राजा लीन कमान उठाय ॥
त्यही समैया त्यहि औसरमा रूपन गये नदीपर आय ११८
पानी देखें रक्त वर्ण सब रूपन गये बहुत चक्राय ॥
ऊंची टिकुरी चढ़ि देखतभे चहुँदिशिरुण्डपैरौंदिखराय ११९
पनी पियायो तहँ घोड़े का झावर गयो तड़ाका आय ॥
जहँना तम्बू था द्यावलिका रूपन अटा तड़ाकाधाय १२०
द्वारे ठाढ़ी द्यावलि माता रूपन बोला बचन सुनाय ॥
पनी पियावन हम नदी गे तहँ विपरीतपरा दिखराय १२१
हमरे मनते यह आवति है नदिया जुझे कन्नौजीराय ॥
खबरि मँगावो तुम लाखनिकै हमरे धीर धरा ना जाय १२२
इतना सुनिकै द्यावलि माता आल्हा पास पहुँची जाय ॥
खबरि सुनाई सब आल्हाको रूपनगयो जौनबतलाय १२३
बारह रानिन का इकलौता ऊदन लाये ताहि लिवाय ॥
होय हँसौवा सब दुनिया मा जोमरिगेयकन्नौजीराय १२४
सातलाख सों चढ़ा पिथौरा देवो उदयसिंह पठवाय ॥
इतना सुनिकै आल्हा बोले माता काह गयी बौराय १२५
गाँजर उसरीथी ऊदन की नदिया लड़ें कन्नौजीराय ॥
कछु नहिं जानैं आल्हा ठाकुर माता साँच दीन बतलाय १२६
नाहिं हँसौवा का डर राखैं प्यारो मोर लहुरवाभाय ॥
जो कहुँ जुझिहैं उदयसिंहजी तौहमकाहकरबफिरिमाय १२७
सुनिकै बातें ये आल्हा की द्यावलि उठी तड़ाका धाय ॥
जहँना तम्बूथा ऊदन का माता अटी तहाँपर आय १२८
आवत दीख्यो जब माता को ऊदन गहा दऊपद जाय ॥
आदर करिकै महतारी का उत्तमआसन दीन बिछाय १२६