आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ आल्हखण्ड । ४५०
आगे हलका भा हाथिन का पाछे चले घोड़ असवार ७६
अभई ठाकुर ह्वाँ ताहर का होवै खूब भड़ाभड़ मार ॥
दूनों मारैं तलवारी सों दूनों लेयँ ढालपर वार ७७
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ७८
को गति बरणै त्यहि समया कै आमाझोर चलै तलवार ॥
बार चूकिगा माहिलवाला झूझा उरई का सरदार ७९
रञ्जित अभई दुउ ठकुरन के उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥
सुरपुर पहुँचे दोऊ ठाकुर ब्रह्मा आयगयो त्यहिबार ८०
लाश पाय कै दुउ बीरन कै मोहबे तुरत दीन पठवाय ॥
सुमिरिगजानन शिवशङ्करको मारन लाग फौज मा जाय ८१
ब्रह्मा मारै तलवारी सों घोड़ा टापन देय गिराय ॥
ब्रह्मा ठाकुर के मुर्च्चामा सईनिगयो तड़ाका आय ८२
हँसिकै बोला सो ब्रह्माते ठाकुर साँच देयँ बतलाय ॥
डोला दैकै चन्द्रावलि का पवनी करो आपनी जाय ८३
सुनिकै बातें ये सईनि की बोला मोहबे का सरदार ॥
नाम न लीन्हे अब डोलाका नहिं मुखघाँसिदेउँ तलवार ८४
सुनिकै बातें ये ब्रह्माकी सईनि मारा गुर्ज उठाय ॥
वार रोकि कै ब्रह्माठाकुर तुरतै दीन्ह्यो मूड़ गिराय ८५
मईनि आवा तब सम्मुखमा सोऊ वार चलावा आय ॥
खाली वार परी मईनि कै ब्रह्मा दीन्ह्यो मूड़ गिराय ८६
मईनि सईनि दोऊ झूझे माहिल अटे तड़ाका धाय् ॥
हाल बतावा पृथीराज का माहिल बारबार समुझाय ८७
इकले ब्रह्मा हैं मोहवेमा तिनका आप लेउ बँधवाय ॥