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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 429, कुल 618 में से

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पृष्ठ 429

४ आल्हाखण्ड । ४२८ -
जैसो स्वपना तुम देखा है तैसो दीख हमौं है भाय ॥
विपदा आई है मल्हना पर साँचो साँच बनाफरराय २३
होत भुरहरे के स्वपना सब साँचे उदयसिंह सरदार ॥
करो बहाना अब गाँजर को औ मोहवे को होउ तयार २४
कुँवा विवाहन की विरिया मा दीन्ह्यो प्राण नेग तुम भाय ॥
चढ़ा पिथौरा है दिल्ली का साँचोस्वपनपरादिखलाय २५
चलिये जल्दी अब मोहवे को लाखनिराना संगलिवाय ॥
इतना सुनिकै द्यावलि वाला लाखनि पास पहुँचा जाय २६
बड़ी नम्रता ते बोलत भा यहु रणबाघु बनाफरराय ॥
जाहिर पवनी है मोहवे की साँची सुनो कनौजीराय २७
मोरि लालसा यह डोलति है पवनी करें मोहोवे जाय ॥
करैं बहाना हम गाँजर को तुमको मोहवा लैवैं दिखाय २८
इतना सुनिकै लाखनि बोले चलिये वेगि बनाफरराय ॥
चरचा करिये नहिं मोहवे की नहिं सब जैहैं काम नशाय २६
करो तयारी अब गाँजर की पहुँचैं नगर मोहोवे जाय ॥
जैसी दवाई रोगी माँगै तैसी वैद देय बतलाय ३०
तैसि खुशहाली भै ऊदन के डंका तुरत दीन बजवाय ॥
हुकुमलगायो फिरि लश्करमा सजिगे सबै शूर समुदाय ३१
जहाँ कचहरी चंदेले की ऊदन तहाँ पहुँचे जाय ॥
हाल बतायो महराजा को दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ३२
लाखनिरानाकी मंशा है गाँजर खेलैं खूब शिकार ॥
म्वारिव लालसा यह डोलतिहै राजा कनउज के सरदार ३३
सुनिकैं बातें बघऊदन की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥
तहँते चलिकै ऊदन देवा आल्हा पास पहुँचे आय ३४