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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 348

[Header] इन्दलहरण । ३४५ २६

काह नेग द्वारे को चहिये सोऊ देयँ आप बतलाय १५५
रूपन बोला द्वारपाल सों यह तुम खबरि सुनाबो जाय ॥
एक पहर भर चलै सिरोही यहही नेग देयँ पठवाय १५६
सुनिकै बातैं ये बारी की आरी द्वारपाल अधिकाय ॥
शोचि समझिकै महराजा सों रूपन कथा सुनाई जाय १५७
इतना सुनिकै अभिनन्दन ने हंसामल को लयो बुलाय ॥
पकरिकै लावो त्यहि बारी को द्वारे जौन रहा बराय १५८
इतना सुनिकै हंसामल ने अपनी लई ढाल तलवार ॥
औरो क्षत्री चलि ठाढ़े भे अपने बाँधि बाँधि हथियार १५९
द्वारे देखें जब बारी को आरी भये सिपाही ज्वान ॥
भीर देखिकै रूपन बारी लाग्योकरन घोरघमसान १६०
चली सिरोही भल द्वारे पर औ बहिचली रक्त की धार ॥
रूपन बारी के मुर्चा पर अंधा धुंध चलै तलवार १६१
रूपन मारे तलवारी सों घोड़ा करै टाप की मार ॥
बड़े लड़ैया काबुल वाले मनसों गये तहाँपर हार १६२
धर्म बनाफर का जाहिर है जिनके जपै तपै का काम ॥
विजय अधर्मिन की दीखी ना रावण कीन बहुतसंग्राम १६३
कंस सुयोधन जरासंध अरु अधरम रूप मरा शिशुपाल ॥
काल कलेवा सबको कीन्ह्यो रहिगा धर्मएक सबकाल १६४
ताते धर्मी आल्हा ठाकुर रूपन खूब करै तलवार ॥
देखि वीरता यह रूपन की हंसा कहा बचनललकार १६५
सँभरिकै बैठै अब घोड़ा पर बारी भली मचाई रार ॥
जियत न जैहै दरवाजे ते हमरी देखि लेय तलवार १६६
इतना सुनिके रूपन बोला क्षत्री गानो कही हमार ॥