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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 280

उदयसिंहका विवाह । २७७ १५

गा हरिकारा तब नरवरमें राजै खबरि दीन बतलाय ८४
गाफिल बैठे का महराजा शिरपर फौज पहूँची आय ॥
सुनिकै बातें हरिकारा की राजा गये सनाकाखाय ८५
आज्ञा दीन्ह्यो मकरन्दा को जावो समरभूमि तुम धाय ॥
इतना सुनतै मकरँद चलिभा तुरतै राजै शीश नवाय ८६
बाण अजीता सेल शनीचर ढूँढ़्यो घोड़ काठको जाय ॥
पता न पायो इन काहूका लाग्यो बार बार पछिताय ८७
हिरिया मालिनि के घर पहुँचा लीन्ह्यो ताको संग लिवाय ॥
चलि मकरन्दा भा नरवरते पहुँचा समरभूमि में आय ८८
आगे घोड़ा मकरन्दा का पाछे सकल सेन समुदाय ॥
ऐसी आगे इन्दल ठाकुर पहुँच्यो समरभूमिमें आय ८६
इन्दल बोल्यो मकरन्दा ते मामा काह गयो बौराय ॥
भाँवरि कैद्यो म्वरे चाचाकी चाची घरै देउ पठवाय ६०
जीति न पैहौ कुल पूज्यनते मामा साँच दीन बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये इन्दल की मकरँद बोला बचनरिसाय ६१
सुनवाँ भौजी के बालकतूम इन्दल बेटा लगो हमार ॥
समर जो करिहौ तुम फूफा ते जैहौ अवशि यमनके द्वार ६२
इतना कहिकै मकरँद ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥
रान रान सों घोड़ा भिड़िगे ऊंटन भिड़िगै ऊंट कतार ६३
सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन क्यार ॥
तेगा छूटे बर्दवान के कोताखानी चलीं कटार ६४
भाला बलछिनकी मारुइ कहुँ कहुँ कहुँ कड़ावीन की मार ॥
चलै भुजाली कहुँ कहुँ गद्दर कहुँकहुँकठिनचलैतलवार ६५
छूटे भाला बलछी सोहैं पै जस खेत बाजरे क्यार ॥