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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 248

उदयसिंहका विवाह । २४५ ७
बाण लागिगा उर मन्मथ का घायल देशराजका लाल ५५
आदर करिकै फिरि देवा का बोला उदयसिंह सरदार ॥
अब दिन थोड़ा अतिबाकी है देखो चलैं शहर को यार ५६
आखिर सोना है बिरवातर सबदिन मारग में सरदार ॥
भागि भरोसे शहर जो पावा तौकस त्यागि चलैं यहिवार ५७
सुनिकै बातें ये ऊदन की देवा मैनपुरी चौहान ॥
ज्योतिष बिद्या के परचय से जाना कुशलकरी भगवान ५८
देवा बोला फिरि ऊदन सों मानो कही लघुरवाभाय ॥
द्रव्य बांधिकै पर पुर जैये यहनहिं हृदयमोर पतियाय ५६
तासों रहिबो तर बिरवा के नीकी बात बनाफरराय ॥
द्रव्य प्राण की घातक जानो मानो साँच बचन तुमभाय ६०
इतना सुनिकै ऊदन बोले साँचौ मानो कही हमार ॥
भय उर राखो कछु जियरे ना चलिये टिकैं यहाँ सरदार ६१
इतना कहिकै बघऊदन ने आगे दीन्ह्यो घोड़ बढ़ाय ॥
पाछे चलिभा देवाठाकुर मनमें बार बार पछिताय ६२
जायकै पहुंचे फुलबगिया में मालिन भीर दीखअधिकाय ॥
तहाँ पै उतरे बघऊदन जब माली पास पहुँचा आय ६३
माली बोला बघऊदन ते दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
चलिकै उतरो बहु मोरे घर ह्याँनहिंटिको मुसाफिरभाय ६४
यह फुलवाई महाराजा की ह्याँसों मेख लेउ उखराय ॥
सुनिकै बातें त्यहि माली की चुप्पै मुहरैं दीन गहाय ६५
पांच अशर्फी माली पायो मनमाँ बड़ा खुशी ह्वैजाय ॥
हाथ जोरिकै माली बोला द्वारे टिको चलै तुम भाय ६६
द्वारे कुइँयाँ मीठा पानी नींबू वृक्ष तहाँ अधिकाय ॥