आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहका विवाह । २४३ ५
कौन शहर है देवा ठाकुर हमको साँच देउ बतलाय ३३
देवा बोला तब ऊदन ते जानो नहीं हमारो भाय ॥
इतना कहिकै दूनों चलि भे रहिगा पावकोस फिरिआय ३४
तहँ चरवाहन को देखत भो तिनसों कह्यो बनाफरराय ॥
कौन शहर औ को राजा है हमको साँच देउ बतलाय ३५
सुनिकै बातें बघऊदन की बोला अहिरपूत तब भाय ॥
नरपति राजा नरवरगढ़ है ओ परदेशी बात बनाय ३६
इतना सुनिकै दूनों चलिभे पुर के पास पहुंचे जाये ॥
तहाँ जलेड़ा बहु नारिन को खैन्नैं बारिकूप में आय ३७
को गति बरखै तिन नारिनकै पतली कमर तीनिबलखाय ॥
दाँत अनारन के बीजासम मीसी हँसत परै दिखलाय ३८
परी बत्तीसी है पानन कै आननकमलखिला जसभाय ॥
छाती सोहैं नवरंगी सम क्युएडी भौंर सरिस दिखरायँ ३६
गजकीशुण्डा सम भुजदण्डा जंघा कदलिथम्भ अनुमान ॥
रूप देखिकै तिन नारिन का तेंहा होयँ अनेकन ज्वान ४०
ऐसी बाला सब आला हैं नाभी यमुन भँवरसम भाय ॥
रूप देखिकै तिन नारिन का पहुँचा पास बनाफरराय ४१
मनमाँ सोचा उदयसिंह तब औ यह ठीक लीन ठहराय ॥
जौने पुरकी अस नारी हैं रानिनरूप वरणि ना जाय ४२
यहै सोचिकै बघऊदन फिरि बोला एक नारिके साथ ॥
पूरब तेनी पश्चिम आये बाबा सूर्य चराचर नाथ ४३
घोड़ पियासा अति हमरो है याको पानी देउ पियाय ॥
बातें सुनिकै ये ऊदन की बोली तुरत नारिसिसियाय ४४
करन दिल्लगी हमसों आयो क्षत्री घोड़े के असवार ॥