आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका विवाह । २१३ १७
नेवता पठवो सब राजन को यहँहीं कुँवाँ बियाहैं माय २३
धायकै चिट्ठी मलखाने की सोई कीन रजापरिमाल ॥
गायके नेवता परिमालिक का आये सबै तहाँ नरपाल २४
तम्बू गड़िगे महराजन के झण्डा आसमान फहरायँ ॥
सुनवाँ बोली हाँ ऊदन ते तुम सुनिलेउलहुरवाभाय २५
ब्याह नगीचे है ब्रह्माका ना मोहबे का भयो तयार ॥
काह तुम्हारे मनमाँ ब्यापी देवर बेंदुल के असवार २६
सुनिकै बातें ये भौजी की बोले उदयसिंह सरदार ॥
हम नहिं जावैं अब मोहबे का भौजी मानों कही हमार २७
सुनिकै बातें ये ऊदन की सुनवाँ कहे बचन मुसुकाय ॥
दूध पियायो मल्हना रानी सेयो तुम्हें बनाफरराय २८
तुम्हें न चाहिये अस बघऊदन धोखा देउ समय पर आय ॥
धोखो दीन्हो माहिल मामा मलखे कैद लीन करवाय २६
कुशल आपने सब लड़काकी चाहैं सदा लहुरवा भाय ॥
को जगरक्षक है जननी सम ऊदन काह गये बौराय ३०
करो तयारी अब भैया सँग मानो कही बनाफरराय ॥
इतना सुनिकै ऊदन चलिभे आल्है खबरिजनायोजाय ३१
बातें सुनिकै बघऊदन की आल्हा लश्करलियोसजाय ॥
बैठे हाथी आल्हा ठाकुर मनमें सुमिरि शारदामाय ३२
चढ़ा बेंदुला की पीढ़ी पर नाहर उदयसिंह सरदार ॥
दशहरिपुरवा ते चलिकै फिरि पहुंचे मोहबे के दरबार ३३
खातिर कीन्ह्यो परिमालिक ने दोऊ भाय बैठि शिरनाय ॥
भई तयारी फिर सिरसा की सबकोउ अटे तहाँपर जाय ३४
गई पालकी तहँ मल्हना की सिरसा भीर भई अधिकाय ॥