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सर्वकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

तीसरा अध्याय ] ४५
१५—सोम राजा के आने पर आतिथ्य हवि बनाई जाती
है। सोमराजा यजमान के घरों में आता है। उसके लिये यह
आतिथ्य हवि तैय्यार की जाती है। इसीलिये इसको आतिथ्य-
हवि कहते हैं। (यह पुरोडाश) नौ कपालों में होता है। प्राण
नौ हैं। प्राणों के बनाने और प्राणों का ज्ञान प्राप्त करने के लिये।
यह पुरोडाश विष्णु का होता है क्योंकि विष्णु ही यज्ञ है। उसी
के देवता और उसी के छन्द से यज्ञ को सम्पादित करते हैं।
जब सोम खरीदा जाता है तो सब छन्द और सब पृष्ठ (सामवेद
के दो मंत्रों के जोड़े) उसके साथ आते हैं। जो-जो लोग राजा
के साथ आते हैं उन सभी का सत्कार किया जाता है।
जब सोम राजा आ जाता है तो अग्नि का मंथन किया जाता
है। जब कोई राजा या अन्य पुरुष आता है तो बैल या बांझ
गाय को मारते हैं। इसी प्रकार अग्नि का मथना भी पशु मारने के
तुल्य है क्योंकि अग्नि देवों का पशु है। ✡ (४)
१६—अध्वर्यु (होता से) कहता है "मथी हुई अग्नि के लिये
पढ़"। इस पर वह इस सविता सम्बन्धी अर्थात् सावित्री ऋचा
को पढ़ता है :—
अभि त्वा देव सवितरीशानं वार्याणाम्।
सदावन् भागमीमहे ॥ (ऋ० १।२४।३)
यहाँ प्रश्न उठता है कि मथी हुई अग्नि के लिये मंत्र बोलना
था और बोला सविता के लिये। यह क्यों ? इसका उत्तर यह
✡सायण ने 'उक्षाणं' का अर्थ 'वृषभ' किया है और 'वेहत्' का
'गर्भघातिनीं वृद्धां गां'। अगले खण्ड में सविता के विषय में जो कहा
गया वह तो बैल या गाय मारने की उपमा को सुसंगत नहीं करता।
यह समस्त प्रकरण विचारणीय है। बहुत से विद्वानों के मत में
अतिथि के लिये बैल या गाय मारने की बात भ्रममूलक है। —ले०