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अग्नि पुराण

Agni Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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DevanagariHindipublished878 पृष्ठ

इस ग्रन्थ के बारे में

अग्निपुराण अठारह महापुराणों में से एक है, जिसकी रचना परम्परा से महर्षि वेदव्यास को मानी जाती है। इसमें अग्निदेव महर्षि वसिष्ठ को उपदेश देते हैं, और इसी कारण इसका नाम अग्निपुराण पड़ा। विषयों की विविधता के कारण इसे प्राचीन भारतीय विद्याओं का एक प्रकार का विश्वकोश कहा जाता है।

इसमें भगवान् के अवतारों, रामायण और महाभारत की संक्षिप्त कथाओं के साथ-साथ मन्दिर-निर्माण, देव-प्रतिमा की प्रतिष्ठा, पूजा-विधि, व्रत, तीर्थ, दान, ज्योतिष, आयुर्वेद, राजनीति, धनुर्वेद, व्याकरण, छन्द और काव्यशास्त्र (अलंकार) जैसे विषयों पर अध्याय मिलते हैं। संस्कृत काव्यशास्त्र और वास्तु के अध्येता भी इस पुराण के कुछ अंशों का विशेष रूप से उपयोग करते हैं।

यह गीताप्रेस, गोरखपुर का संस्करण है (पुस्तक संख्या १३६२), जिसमें मूल संस्कृत के स्थान पर केवल उसका हिन्दी अनुवाद दिया गया है। यह प्रति संवत् २०७६ का अठारहवाँ पुनर्मुद्रण है, और तब तक इसकी कुल ७९,००० प्रतियाँ छप चुकी थीं। आरम्भ में प्रकाशक का 'नम्र निवेदन' है। ८७८ पृष्ठों का यह अनुवाद हिन्दी पाठकों को पूरे पुराण को एक साथ पढ़ने का अवसर देता है।

पृष्ठ 878–878, कुल 878 में से

गीताप्रेस गोरखपुर

GITA PRESS, GORAKHPUR [SINCE 1923]

गीताप्रेस, गोरखपुर — २७३००५

फोन : ( ०५५१ ) २३३४७२१, २३३१२५०, २३३१२५१

Code 1362

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