अगस्त्य संहिता (महर्षि अगस्त्य - पञ्चरात्र राम-उपासना एवं मन्त्र-विधान सटीक)
Agastya Samhita of Sage Agastya with Commentary
महर्षि अगस्त्य / पं. भवनाथ झा द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 337 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना (45)
एकादश अध्याय
इस अध्याय में सकाम पूजन का प्रायोगिक विवरण है कि यजमान
स्नानादि से शरीर की बाह्यशुद्धि कर मातृका-न्यास से अन्तःशुद्धि करें। तब पूजा
की सामग्रियों को स्वच्छ कर शंख आदि की पूजा करें। तब वैष्णवन्यास, केशवादिन्यास
कर तत्त्वन्यास एवं मूर्तिपंजर-न्यास करें। इस प्रकार षडंग न्यास सम्पन्न कर बाह्य
पूजा की तैयारी करें। यहाँ वेदी, अष्टदलकमल, तोरण आदि की निर्माण-विधि
वर्णित है। यहाँ कहा गया है कि पुण्यमयी स्त्रियों और गृहस्थों के घिरे हुए स्थान
में गायन, वादन और नृत्य के साथ यह आराधना करें। पूजा में प्रयुक्त सामग्रियों
का स्थान निर्धारण तथा उनकी आकृति का विवेचन यहाँ किया गया है। इसी क्रम
में भूतशुद्धि, हस्तशोधन, पादशोधन आदि की दूसरी परिभाषा भी दी गयी है।
जैसे पूजा के लिए पत्र-पुत्र को भक्तिपूर्वक उठाना कर-शोधन है। श्रीराम की
कथा का श्रवण और उनके उत्सवों का दर्शन कर्ण एवं नेत्र की शुद्धि है।
द्वादशाध्याय
इस अध्याय में मातृका-न्यास का क्रम बतलाया गया है। 'अ' से 'ह' तक
के 52 वर्ण को अनुस्वार के साथ शरीर के प्रत्येक अंग में नियोजित करना
मातृकान्यास है। इसी में केशवकीर्त्यादि न्यास भी वर्णित है। साधक अपने शरीर
में बीजाक्षरों और देवताओं को व्यस्त कर देवत्व प्राप्त कर लेता है तथा उसका यह
पांचभौतिक शरीर पवित्र हो जाता है। इस सम्पूर्ण अध्याय में शरीर के विभिन्न
न्यासों का निरूपण किया गया है।
त्रयोदशाध्याय
इस अध्याय में पूजा के पात्रों को यथास्थान रखकर शंखपात्र में सामान्यार्घ्य-
स्थापन की विधि प्रारम्भ में बतलायी गयी है कि शंख को आधार पर रखकर
सूर्य, चन्द्र और अग्नि के बीज मन्त्र से तीनों मण्डलों की पूजा कर के शंख जल में
अंकुश मुद्रा से तीर्थों का आवाहन कर, शंखमुद्रा, चक्रमुद्रा, गरुड़मुद्रा, सुरभिमुद्रा
आदि का प्रदर्शन कर देव का अभिषेक करें और उसी जल से यजमान अपने
शरीर एवं अन्य सामग्रियों को पवित्र करें। आगे पाद्य, अर्घ्य, आचमन आदि की
स्थापना, स्नपन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि का विस्तृत वर्णन है।
चतुर्दशाध्याय
इस अध्याय में हवन-विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसमें
विभिन्न प्रकार एवं परिमाग के कुण्डों का निर्माण, मेखला की संख्या, लम्बाई,