आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)
Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning
महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
DevanagariHindipublished32 पृष्ठ
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आदित्यहृदयस्तोत्रम् ८
सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥ ५॥
‘सबके हृदयमें रमण करनेवाले महाबाहो राम ! यह सनातन गोपनीय
स्तोत्र सुनो। वत्स! इसके जपसे तुम युद्धमें अपने समस्त शत्रुओंपर
विजय पा जाओगे। इस गोपनीय स्तोत्रका नाम है ‘आदित्यहृदय’। यह
परम पवित्र और सम्पूर्ण शत्रुओंका नाश करनेवाला है। इसके जपसे
सदा विजयकी प्राप्ति होती है। यह नित्य अक्षय और परम कल्याणमय
स्तोत्र है। सम्पूर्ण मंगलोंका भी मंगल है। इससे सब पापोंका नाश हो
जाता है। यह चिन्ता और शोकको मिटाने तथा आयुको बढ़ानेवाला
उत्तम साधन है’ ॥ ३—५॥