आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)
Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning
महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
DevanagariHindipublished32 पृष्ठ
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आदित्यहृदयस्तोत्रम् १२
हैं। ये नित्य उदय होनेवाले (समुद्यन्), देवता और असुरोंसे नमस्कृत,
विवस्वान् नामसे प्रसिद्ध, प्रभाका विस्तार करनेवाले (भास्कर) और
संसारके स्वामी (भुवनेश्वर) हैं। तुम इनका [रश्मिमते नमः, समुद्यते
नमः, देवासुरनमस्कृताय नमः, विवस्वते नमः, भास्कराय नमः, भुवनेश्वराय
नमः—इन नाम-मन्त्रोंके द्वारा] पूजन करो। ‘सम्पूर्ण देवता इन्हींके
स्वरूप हैं। ये तेजकी राशि तथा अपनी किरणोंसे जगत्को सत्ता एवं
स्फूर्ति प्रदान करनेवाले हैं। ये ही अपनी रश्मियोंका प्रसार करके
देवता और असुरोंसहित सम्पूर्ण लोकोंका पालन करते हैं। ये ही
ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कन्द, प्रजापति, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्रमा,