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सर्वकोश
१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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(-प्रतिदिन ही तुम थकते चले जा रहे हो। हे सम्राट्! तुम अपने प्राणों की रक्षा के लिए प्रार्थना करो (अंग्रेजों से), क्योंकि अब
भारत की तलवार सदैव के लिए टूक-टूक हो गई हैं।)
उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर भी इन शब्दों में दिया-
ग़ाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की।
तख्ते लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्थान की।।
(-हमारे वीरों के अंतःकरण में जब तक आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना विद्यमान है तब तक हिंदुस्थान की पावन
कृपाण लंदन तक भी वार करती रहेगी।)