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सर्वकोश
१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)

1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 418 में से

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पृष्ठ 205

अवध प्रांत के सीतापुर से लगा हुआ जिला है बहराइच। यहां का कमिश्नर विंगफील्ड था और उसके अधिकार में चार शहर
सिकोरा, मालापुर, गोंडा और बहराइच थे। इसमें से सिकोरा में नेटिवों की दो पैदल रेजिमेंट और एक तोपखाना था। वहां
विद्रोह होने के संकेत दिखते ही अंग्रेज स्त्री-बच्चों को लखनऊ भेज दिया। 9 जून की प्रातः अंग्रेजों में से बहुत से अधिकारी
घोड़े पर बैठकर स्वयं की बलरामपुर के राजा के यहां चले गए। केवल तोपखाने का अधिकारी बोन्हम अपने अधीनस्थ
सिपाहियों पर पूरा भरोसा कर डटा रहा। परंतु शाम को उसे सिपाहियों ने साफ-साफ कहा कि "यद्यपिह म आपको तनिक
भी क्षति नहीं पहुंचाएंगे, फिर भी हमने अंग्रेजी गुलामी छोड़ दी है और हम अपने देशबंधुओं पर कभी भी गोलियां नहीं
चलाएंगे।" यह सुनते ही हारकर वह अधिकारी भी स्थान छोड़कर निकल गया। उसे सिपाहियों ने यह भी बता दिया कि
सुरक्षित राह कौन सी है और वह सुरक्षित लखनऊ पहुंच गया। सिकोरा स्वतंत्र होने की सूचना गोंडा में आते ही वह शहर भी
विद्रोह कर उठा। यह देखते ही स्वयं कमिश्नर विंगफील्ड के साथ सारे अंग्रेज लोग बलरामपुर के राजा के पास भाग गएं इस
राजा ने कोई पच्चीस अंग्रेज शरणार्थियों को शरण दी और उन्हें उचित अवसर पर ब्रिटिश छावनी में पहुंचा दिया।
सिकोरा और गोंडा स्वतंत्र हो जाने का समाचार बहराइच में पहुंचते ही वहां स्थित अंग्रेज अधिकारी विद्रोह होने की राह न
देख उस मुख्य शहर को छोड़कर 10 जून को ही लखनऊ की ओर भाग खड़े हुए। पर इस समय सारे अवध प्रांत में
विद्रोहियों कीचौकियां स्थान-स्थान पर बन जाने के कारण नेटिव लोगों के स्वांग धरे और एक नाव में बैठकर घाघरा नदी
पार करने लगे। पहले उनकी ओर किसी 1क ध्यान नहीं गया, पर आधी नदी पार होते-होते 'फिरंगी-फिरंगी' की आवाजें आने
लगीं। मल्लाहों ने नौकाएं छोड़ दीं और वे अंग्रेज अधिकारी मार डाले गए। इन अधिकारियों के साथ ही उस बहराइच प्रांत से
ब्रिटिश सत्ता समाप्त हो गई। मालापुर में अभी तक लश्करी छावनी नहीं थी फिर भी वह जिला छोड़कर भाग जाने के सिवाय
अंग्रेजों को कोई गति नहीं रही-इतना लोकक्षोभ वहां था। वे जब भाग रहे थे तब एक राजा ने उन्हें जितना बना उतना
संरक्षण दिया। परंतु जल्द ही विद्रोहियों की तलवार या वनवास के कष्टों ने उनकी बलि ली।
अवध प्रांत के पूर्व भाग का मुख्य शहर फैजाबाद था और उसका कमिश्नर गोल्डवे भी वहीं रहता था। फैजाबाद विभाग में
सुललानपुर, सलोनी और फैजाबाद तीन जिले आते थे। फैजाबाद शहर में इस समय 22वीं पैदल और 6वीं इरेंग्युलर पैदल
रेजिमेंट, कुछ घुड़सवार और तोपखाना था। कर्नल लेनाक्स इन सबका सेनापति था। फैजाबाद विभाग में जुल्म बहुत बढ़ गया
था। सर हेनरी स्वयं लिखता है-"तालुकेदारों से क्रूरता का व्यवहार किया गया है। फैजाबाद प्रांत में उनके आधे गांव छीन
लिये गए हैं और कहीं-कहीं तो पूरे ही छीने गए हैं" ऐसे अत्याचारों का प्रतिशोध जल्द ही
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