Skip to content
SarvaKosh
Back to the archive

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

by स्वामी अड़गड़ानन्द

Source: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (origin)

DevanagariHindipublished429 pages
Page 428Permalink

गीता आपका
धर्मशास्त्र है।
विश्व में प्रचलित सम्पूर्ण
धार्मिक विचारों के आदि
उद्गम स्थल भारत के समस्त
अध्यात्म और आत्मस्थिति
दिलानेवाले सम्पूर्ण शोध के
साधन-क्रम का स्पष्ट वर्णन इस
गीता में है, जिसमें ईश्वर एक,
पाने की क्रिया एक, पथ में
अनुकम्पा एक तथा परिणाम
एक है - वह है प्रभु का दर्शन,
भगवत्स्वरूप की प्राप्ति और
काल से अतीत अनन्त जीवन।
देखें - 'यथार्थ गीता'।

Page 429Permalink

शास्त्र
परमात्मा में प्रवेश दिलानेवाले क्रियात्मक
अनुशासन के नियमों का संकलन ही शास्त्र है।
इस दृष्टि से भगवान श्रीकृष्णोक्त गीता सनातन,
शाश्वत धर्म का शुद्ध शास्त्र है; जो चारों वेद,
उपनिषद, समस्त योगशास्त्र, रामचरित मानस
तथा विश्व के सभी दर्शनशास्त्रों का अकेले ही
प्रतिनिधित्व करती है। गीता मानव मात्र के लिए
धर्म का अतर्क्य शास्त्र है।
परमात्मा का निवास
वह सर्वसमर्थ, सदा रहनेवाला परमात्मा मानव
के हृदय में स्थित है। सम्पूर्ण भावों से उसकी
शरण जाने का विधान है, जिससे शाश्वत धाम,
सदा रहनेवाली शान्ति तथा अनन्त जीवन
की प्राप्ति होती है।
सन्देश
सत्य वस्तु का तीनों कालों में अभाव नहीं है और
असत्य वस्तु का अस्तित्व नहीं है। परमात्मा ही
तीनों कालों में सत्य है, शाश्वत है, सनातन है।

  • स्वामी अड़गड़ानन्द
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    ५२००
    वर्षों के लम्बे
    अन्तराल के बाद
    श्रीमद्भगवद्गीता की
    शाश्वत व्याख्या
    ॥ श्रीमद् भगवद् गीता ॥
    ॥ यथार्थ गीता ॥
    मानव धर्मशास्त्र
    ॐ
    श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट
    न्यू अपोलो एस्टेट, गाला नं 5, मोगरा लेन (रेलवे सबवे के पास), अंधेरी (पूर्व), मुम्बई – 400069
    फोन - (022) 28255300 • ई-मेल - [email protected] • वेबसाइट - www.yatharthgeeta.com