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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 78 of 421

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Page 78

पूर्वार्ध छठा अध्याय
याजक उन यजमानों के मन से युक्त हो. वह उन यजमानों के मन प्राण से युक्त
हो. वह उन यजमानों के दिव्य प्राण से युक्त हो. अग्नि व जल देव आप को शोभा
युक्त बनाने की कृपा करें. वायु देव की गति एवं सूर्य की ऊर्जा परिपक्व हो. सब के
विकार व द्वेष नष्ट हों. ( १८ )
घृतं घृतपावानः पिबत वसां वसापावानः पिबतान्तरिक्षस्य हविरसि स्वाहा.
दिशः प्रदिश ऽ आदिशो विदिश ऽ उद्दिशो दिग्भ्यः स्वाहाः.. (१९)
घी पीने वाले घी पीएं. वसा पीने वाले वसा पीएं. घी और वसा अंतरिक्ष के
लिए हवि हों. घी और वसा दोनों के लिए स्वाहा. दिशा के लिए स्वाहा. प्रदिशा के
लिए स्वाहा. शत्रु के लिए स्वाहा. अमर के लिए स्वाहा. सब के लिए स्वाहा. ( १९ )
ऐन्द्रः प्राणो अङ्गे अङ्गे निदीध्यदैन्द्र ऽ उदानो अङ्गे अङ्गे निधीतः.
देव त्वष्टर्भूरि ते स ᳪ समेतु सलक्ष्मा यद्विषुरूपं भवाति.
देवत्रा यन्तमवसे सखायोनु त्वा माता पितरो मदन्तु.. (२०)
अंगअंग, प्राणप्राण व उदान में इंद्र विराजमान हैं. त्वष्टा इन सब की सुरक्षा
करने की कृपा करें. इंद्र की शक्ति इन सब की सुरक्षा करने की कृपा करे. देव की
शक्ति इन सब की रक्षा करने की कृपा करें. देव हमारे सखाओं का कल्याण करने
की कृपा करें. देव हमारे मातापिता को आनंदित करने की कृपा करें. ( २० )
समुद्रं गच्छ स्वाहान्तरिक्षं गच्छ स्वाहा देव ᳪ सवितारं गच्छ स्वाहा मित्रावरुणौ गच्छ
स्वाहाहोरात्रे गच्छ स्वाहा छन्दा ᳪ सि गच्छ स्वाहा द्यावापृथिवी गच्छ स्वाहा यज्ञं गच्छ
स्वाहा सोमं गच्छ स्वाहा दिव्यं नभो गच्छ स्वाहाग्निं वैश्वानरं गच्छ स्वाहा मनो मे हार्दि
यच्छ दिवं ते धूमो गच्छतु स्वर्ज्योतिः पृथिवीं भस्मनापृण स्वाहा.. (२१)
यजमान द्वारा दी गई हवि समुद्र तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी
गई हवि अंतरिक्ष तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि सविता देव
तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि मित्र देव तक जाए,
कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि वरुण देव तक जाए, कल्याणकारी हो.
यजमान द्वारा दी गई हवि दिन देव तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई
हवि रात्रि देव तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि छंद तक जाए,
कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि स्वर्गलोक तक जाए, कल्याणकारी हो.
यजमान द्वारा दी गई हवि पृथ्वी लोक तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी
गई हवि यज्ञ देव तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि सोम तक
जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी गई हवि नभ देव तक जाए, कल्याणकारी
हो. यजमान द्वारा दी गई हवि अग्नि तक जाए, कल्याणकारी हो. यजमान द्वारा दी
गई हवि वैश्वानर तक जाए, कल्याणकारी हो. देवगण हमारे मन को हार्दिक दिव्यता
प्रदान करें. अग्नि का धुआं सर्वत्र जाए. अग्नि की ज्योति और भस्म पृथ्वीलोक को
७८ - यजुर्वेद