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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 69 of 421

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Page 69

पूर्वार्ध पांचवां अध्याय
सब देवताओं को सविता ने पैदा किया है. अश्विनी के बाहुओं से हम आप
को स्वीकारते हैं. पूषा देव के हाथों हम आप को स्वीकारते हैं. आइए, आप हमें
सहायता दीजिए. हम राक्षसों की गरदनें छेदते हैं, काटते हैं. आप विशाल व बहुत
अधिक आवाज करने वाले हैं. आप इंद्र के लिए वाणी (मंत्र) दीजिए अर्थात्
मंत्रपाठ कीजिए. (२२)
रक्षोहणं वलगहनं वैष्णवीमिदमहं तं वलगमुत्किरामि यं मे निष्ट्यो यममात्यो
निचखानेदमहं तं वलगमुत्किरामि यं मे समानो यमसमानो निचखानेदमहं तं
वलगमुत्किरामि यं मे सबन्धुर्यमसबन्धुर्निचखानेदमहं तं वलगमुत्किरामि यं मे
सजातो यमसजातो निचखानोत्कृत्यां किरामि.. (२३)
राक्षसों का हनन करने वाले मंत्रपाठ कीजिए. अतिचार साधनों का नाश करने
वाले मंत्रपाठ कीजिए. पोषणता देने वाले मंत्रपाठ कीजिए. अभिचार साधनों का
नाश करने वाले मंत्रपाठ कीजिए. अनिष्ट निवारण हेतु मंत्रपाठ कीजिए. छिपा कर
रखे हुए अनिष्टकर साधनों के नाश हेतु मंत्रपाठ कीजिए. छिपा कर रखे हुए
अभिचार साधनों को हम खोद कर उखाड़ फेंकते हैं. हमारे सजातियों ने जो
अनिष्टकारी प्रयोग किए हैं, हम उन्हें खोद कर उखाड़ फेंकते हैं. (२३)
स्वराडसि सपत्नहा सत्रराडस्यभिमातिहा जनराडसि रक्षोहा सर्वराडस्यमित्रहा.. (२४)
हे गर्त! स्वयं प्रकाशवान, शत्रुनाशी, यज्ञ सत्र तक रहने वाले, अभिमान नाशक,
जनों के रक्षक व राक्षस हंता (मारने वाले) हैं. सभी के प्रकाशक और अमित्रों के
नाशक हैं. (२४)
रक्षोहणो वो वलगहनः प्रोक्षामि वैष्णवान् रक्षोहणो वो वलगहनोवनयामि वैष्णवान्
रक्षोहणो वो वलगहनोवस्तृणामि वैष्णवान् रक्षोहणौ वां वलगहना ऽ उप दधामि
वैष्णवी रक्षोहणौ वां वलगहनौ पर्यूहामि वैष्णवी वैष्णवमसि वैष्णवा स्थ.. (२५)
राक्षस नाश हेतु हम गड्ढा खोदते हैं. अभिचार नाश हेतु हम गड्ढा खोदते हैं.
विष्णु को इन गड्ढों में अधिष्ठित करते हैं. उन के हेतु हम गड्ढों में जल छिड़कते
हैं. उन के हेतु हम गड्ढों में कुश का आसन बिछाते हैं. वे राक्षस व अभिचार नाशक
हैं. उन के हेतु हम गड्ढों में फलक (पटरा) रखते हैं. वे राक्षस व अभिचार नाशक
हैं. उन के हेतु हम गड्ढों में मिट्टी व पत्थर बिछाते हैं. आप पालक हैं.
हे विष्णु! स्थिर होने की कृपा करें. (२५)
देवस्य त्वा सवितुः प्रसवे ऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्.
आददे नार्यसीदमह ष्षं रक्षांसां ग्रीवा ऽ अपिकृन्तामि.
यवोसि यवयास्मद्द्वेषो यवयारातीर्दि वे त्वान्तरिक्षाय त्वा पृथिव्यै त्वा शुन्धन्ताँल्लोकाः
पितृषदनाः पितृषदनमसि.. (२६)
यजुर्वेद - ६९