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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 62 of 421

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पूर्वार्ध चौथा अध्याय
हमारी ओर पधारने की कृपा करें. आप इंद्र देव की दाईं जंघा में प्रवेश करने की
कृपा करें. आप सुखदायी, पाप के शत्रु, संसार के पालक, सुंदर हाथों वाले तथा
कृश ( दुर्बल ) लोगों के पालक हैं. जिनजिन से सोम को खरीदा जा सकता है, आप
उनउन की रक्षा करने की कृपा कीजिए. ( २७ )
परि माग्ने दुश्चरिताद्वाधस्वा मा सुचरिते भज.
उदायstore स्वायुषोदस्थाममृताँ २ ऽ अनु.. ( २८ )
हे अग्नि! आप हमें पूरी तरह पाप से बचाने की कृपा करें. आप बुरे चरित्र वालों
का वध कीजिए. आप सच्चरित्रवान को स्थापित करने की कृपा कीजिए. हम आप
की उत्कृष्ट आयु से अपनी श्रेष्ठ आयु के लिए आप की अमरता का अनुसरण करते
हैं. ( २८ )
प्रति पन्थामपद्महि स्वस्तिगामनेहसम्.
येन विश्वाः परि द्विषो वृणक्ति विन्दते वसु.. (२९)
हे अग्नि! हम उस मार्ग का अनुसरण करें जो मंगलमय व सुगम हो, जिस पथ
पर जाने से द्वेषियों का पूरी तरह नाश हो और हमें धन की प्राप्ति हो. ( २९ )
अदित्यास्त्वगस्यदित्यै सद आसीद.
अस्तभ्नाद्यां वृषभो अन्तरिक्षममिमीत वरिमाणं पृथिव्याः.
आसीदद्विश्वा भुवनानि सम्राड्विश्वेत्तानि वरुणस्य व्रतानि.. (३०)
हे आसन! आप पृथ्वी की त्वचा जैसे हैं. आप यज्ञवेदी पर विराजने की कृपा
कीजिए. बलवान वरुण स्वर्गलोक को माप लेते हैं. अंतरिक्षलोक को माप लेते हैं.
पृथ्वीलोक को माप लेते हैं. वे सभी लोकों में व्याप्त हैं. उन के व्रत भलीभांति
शोभते हैं. ( ३० )
वनेषु व्यन्तरिक्षं ततान वाजमर्वत्सु पय ऽ उस्त्रियासु.
हृत्सु क्रतुं वरुणो विश्वग्निं दिवि सूर्यमदधात् सोममद्रौ.. (३१)
वरुण ने अंतरिक्ष को ताना. बल व गायों में दूध की बढ़ोतरी की. हृदय में यज्ञ
शक्ति स्थापित की. अग्नि की स्थापना की. स्वर्गलोक में सूर्य को एवं पर्वत पर सोम
को स्थापित किया. ( ३१ )
सूर्यस्य चक्षुरारोहाग्नेरक्षणः कनीनकम्.
यत्रैतशोभिरीयसे भ्राजमानो विपश्चिता.. (३२)
हे वरुण देव! आप सूर्य के चक्षु हैं. आप अग्नि की आंख हैं. आप आंख की
पुतली पर आरोहण की कृपा कीजिए. आप प्रकाशमान हैं. आप यहां शोभित होने
की कृपा कीजिए. ( ३२ )
६२ - यजुर्वेद