यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 38 of 421
Read in contextपूर्वार्ध पहला अध्याय
अदित्यै रास्नासि विष्णोर्वेषोऽस्यूर्जे त्वादब्धेन त्वा चक्षुषावपश्यामि.
अग्नेर्जिह्वासि सुहूर्देवेभ्यो धाम्ने धाम्ने मे भव यजुषे यजुषे.. (३०)
हे अदिति देव! आप रसमय, विष्णु के वास स्थल व ऊर्जस्वी हैं. हम कमल
जैसे नेत्रों से बारबार आप को देखते हैं. आप अग्नि की जीभ, देवताओं के निवास
स्थल व सर्वत्र व्यापक हैं. हे यजमानो! आप धामधाम पर ऐसे देव को पुकारें व
आमंत्रित करें. ( ३० )
सवितुस्त्वा प्रसव ऽ उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः.
सवितुर्वः प्रसव ऽ उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः.
तेजोसि शुक्रमस्यमृतमसि धाम नामासि प्रियं देवानामनाधृष्टं देवयजनमसि (३१)
सविता ने यज्ञ साधनों को उत्पन्न किया है. बिना छेद वाली पवित्र सूर्य की किरणों
से इन यज्ञ-साधनों को शुद्ध करते हैं. आप तेजस्वी, चमकीले, अमृत देवताओं के प्रिय
तथा अधृष्ट (विनयी) हैं. आप देवताओं के लिए किए जा रहे इस यज्ञ के प्रमुख
साधन हैं. ( ३१ )
३८ - यजुर्वेद