यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextउत्तरार्ध तेईसवां अध्याय
की सम्यक् रूप से रक्षा करें. वे इस यज्ञ की अग्नि को सम्यक् रूप से शांत करने
की कृपा करें. ( ३७ )
कुविदङ्ग्यवमन्तो यवञ्चिद्यथा दान्त्यनुपूर्वं वियूय.
इहेहैषां कृणुहि भोजनानि ये बर्हिषो नम ऽ उक्तिं यजन्ति.. ( ३८ )
हे सोम! यवमान यानी जौ से पूरी तरह भरी हुई फसल को हम सब बहुत
सोचविचार कर सावधानीपूर्वक काटते हैं. हम दया से परिपूर्ण आप को कुश का
आसन भेंट करते हैं. आप यहां आने व भोजन करने की कृपा कीजिए. ये यजमान
कुश के आसन पर बैठ कर नमस्कारपूर्वक आप के लिए यज्ञ कर रहे हैं. ( ३८ )
कस्त्वा च्छ्यति कस्त्वा विशास्ति कस्ते गात्राणि शम्यति.
क ऽ उ ते शमिता कवि:.. ( ३९)
कौन आप को आजाद करता है ? कौन आप को आदेश ( उपदेश ) देता है ?
कौन आप को शांत करता है ? कौन आप को सुख देता है ? विद्वान् ( कवि )
परमात्मा ही यह सब करते हैं. ( ३९ )
ऋतवस्त ऽ ऋतुथा पर्व शमितारो वि शासतु.
संवत्सरस्य तेजसा शमीभिः शम्यन्तु त्वा.. ( ४० )
ऋतुएं ऋतु के अनुसार सुखदायी हों. पर्व सुखद व अनुशासन में रहें. संवत्सर
के तेज से सुख मिले. शांतिदायी कर्म आप के लिए सुखद हों. ( ४० )
अर्धमासाः परूंषि ते मासा ऽ आ च्छ्यन्तु शम्यन्तः.
अहोरात्राणि मरुतो विलिष्टं सूदयन्तु ते.. ( ४१ )
हे परम पुरुष! आधे माह पक्ष और मास से आयु क्षीण होती है. मरुद्गण
दिनरात आप के दुःख दूर करने की कृपा करें. ( ४१ )
दैव्या अध्वर्यवस्त्वा च्छ्यततु वि च शासतु.
गात्राणि पर्वशस्ते सिमाः कृण्वन्तु शम्यन्तीः.. ( ४२ )
इस यज्ञ के अध्वर्यु ( पुरोहित ) आप के दोषों का क्षय करें व आप के
अनुशासन हेतु मार्गदर्शन करें. इस यज्ञ के अध्वर्यु आप के शरीर उस के जोड़ों को
शक्तिमान बनाने की कृपा करें. ( ४२ )
द्यौस्ते पृथिव्यन्तरिक्षं वायुश्छिद्रं पृणातु ते.
सूर्यस्ते नक्षत्रैः सह लोकं कृणोतु साधुया.. ( ४३ )
हे परमात्मा! आप पृथ्वीलोक ( यजमान ) को परिपूर्ण बनाने की कृपा करें.
आप अंतरिक्षलोक के दोष दूर करें. आप अंतरिक्षलोक को परिपूर्ण बनाने की कृपा
यजुर्वेद - २९१