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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

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Page 298

उत्तरार्ध तेईसवां अध्याय
पुष्टता से खुश नहीं होते बल्कि अपनी हानि से दुःखी ही होते हैं. वैसे ही कोई शूद्रा
आर्यजन से ज्ञान पाती है तो उस का पति उस की इस ज्ञान प्राप्ति से ज्ञान पोषण को
नहीं मानता. ( ३१ )
दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः.
सुरभि नो मुखा करत्प्र ण ऽ आयूं षि तारिषत्.. (३२)
हम शक्तिशाली यज्ञ की अग्नि को विधिविधानपूर्वक संस्कार युक्त बनाते हैं.
यज्ञ देव की कृपा हमारे मुखों को सुगंधमय व हमें आयुष्मान बनाए. यज्ञ देव की
कृपा हमारा तारण करें. ( ३२ )
गायत्री त्रिष्टुब्जगत्यनुष्टुप्पङ्क्त्या सह.
बृहत्युष्णिहा ककुप्सूचीभिः शम्यन्तु त्वा.. (३३)
हे यज्ञाग्नि! हम गायत्री, त्रिष्टुप्, जगती, अनुष्टुप्, पंक्ति, बृहती, उष्णिाक्,
ककुप् छंद व सूचियों से आप को शांत करते हैं. आप शांत होने की कृपा
कीजिए. ( ३३ )
द्विपदा याश्चतुष्पदास्त्रिपदा याश्च षट्पदाः.
विच्छन्दा याश्च सच्छन्दाः सूचीभिः शम्यन्तु त्वा.. (३४)
हे यज्ञाग्नि! जो दो, तीन, चार, छह पद वाले, छंद छंदहीन व छंद छंदयुक्त हैं,
वे सूचियों द्वारा आप को शांति प्रदान करें. ( ३४ )
महानाम्न्यो रेवत्यो विश्वा आशाः प्रभूवरीः.
मैध्रीर्विद्युतो वाचः सूचीभिः शम्यन्तु त्वा.. (३५)
हे यज्ञाग्नि! सब प्राणियों को धारण करने वाली ऋचाएं, समस्त दिशाएं,
‘महानाम्नी’ देववाणियां, रेवती नमक ऋचाएं, बादलों की बिजली और श्रेष्ठ
वाणियां सूचियों द्वारा आप को शांति प्रदान करें. ( ३५ )
नार्यस्ते पत्न्यो लोम विचिन्वन्तु मनीषया.
देवानां पत्न्यो दिशः सूचीभिः शम्यन्तु त्वा.. (३६)
हे यज्ञाग्नि! यजमान की पत्नियां नेतृत्व करने में समर्थ हैं. हे यजमान! वे नारियां
आप के लोमों को बुद्धिपूर्वक चुन कर अलग करने की कृपा करें. देवगणों की
पत्नियां व दिशाएं सूची से आप को शांत करने की कृपा करें. ( ३६ )
रजता हरिणीः सीसा युजो युज्यन्ते कर्मभिः.
अश्वस्य वाजिनस्त्वचि सिमाः शम्यन्तु शम्यन्तीः.. (३७)
चांदी, सीसा और सोना विधिविधानपूर्वक यज्ञ में जोड़ा जाता है. वे इस यज्ञ
२९८ - यजुर्वेद