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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 270 of 421

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Page 270

उत्तरार्ध
इक्कीसवां अध्याय
इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृडय. त्वामवस्युरा चके.. (१)
हे वरुण देव! हमारी प्रार्थना सुनने की कृपा करें. आज जो हम हवन कर
रहे हैं, उस से हमें सुख प्रदान करें. हम अपनी रक्षा के लिए आप का आह्वान
करते हैं. ( १ )
तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः.
अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुश १४ स मा न ऽ आयुः प्र मोषीः.. ( २)
ये यजमान ब्रह्मज्ञानमय ऋचाओं से आप की वंदना कर रहे हैं. आहुतियां अर्पित
कर रहे हैं. उन से आप यजमान पर प्रसन्न होइए. वरुण देव बहुप्रशंसित व देव पूजित
हैं. आप जाग्रत होइए और हमारी आयु क्षीण मत कीजिए. ( २ )
त्वं नो अग्ने वरुणस्य विद्वान् देवस्य हेडो अव यासिसीष्ठाः.
यजिष्ठो वह्नितमः शोशुचानो विश्वा द्वेषा १४ सि प्र मुमुग्ध्यस्मत्.. (३)
हे अग्नि! आप विद्वान् हैं. आप आहुतियों को देवताओं तक पहुंचाने वाले हैं.
आप यज्ञ में पूजित, बहुत दीप्तिमान व पवित्र हैं. आप वरुण देव को हम पर प्रसन्न
कराइए. हमारे सभी द्वेषियों को नष्ट करने की कृपा कीजिए. ( ३ )
स त्वं नो अग्नेवमो भवोती नेदिष्ठो अस्या ऽ उषसो व्युष्टौ.
अव यक्ष्व नो वरुण १४ रराणो वीहि मृडीक १४ सुहवो न ऽ एधि.. (४)
हे अग्नि! प्रातः अपने रक्षा साधनों सहित हमारे पास पधारिए. हमारी रक्षा करने
व आहुतियों को देवताओं तक पहुंचाने की कृपा कीजिए. आप उन्हें तृप्ति दीजिए.
आप अच्छी तरह बुलाने योग्य हैं. आप इस सुखदायक आहुति को स्वीकारने की
कृपा कीजिए. ( ४ )
महीम् षु मातर १४ सुव्रतानामृतस्य पत्नीमवसे हुवेम.
तुविक्षत्रामजरन्तीमुरूचीं १४ सुशर्माणमदिति १४ सुप्रणीतिम्.. (५)
२७० - यजुर्वेद