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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 266 of 421

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Page 266

पूर्वार्ध बीसवां अध्याय
धन पाया. उस हवि और श्रेष्ठ धन को इंद्र देव के लिए अर्पित किया. ( ६७ )
यमश्विना सरस्वती हविषेन्द्रमवर्धयन्.
स बिभेद बलं मघं नमुचावासुरे सचा.. ( ६८)
अश्विनीकुमार और सरस्वती देवी ने उस हवि से इंद्र देव की बढ़ोत्तरी की.
सचेत इंद्र देव ने उस से नमुचि असुर के बल को भेदा. ( ६८ )
तमिन्द्रं पशवः सचाश्विनोभा सरस्वती.
दधाना ऽ अभ्यनूषत हविषा यज्ञ ऽ इन्द्रियैः.. ( ६९)
अश्विनीकुमार और सरस्वती देवी ने इंद्र देव को पशुओं के दूध, दही और घी
से बनी हवि अर्पित की. उस हवि से उन का बल और यज्ञ बढ़ाया. उन दोनों की
सब प्रकार से प्रशंसा हुई. ( ६९ )
य ऽ इन्द्र इन्द्रियं दधुः सविता वरुणो भगः.
स सुत्रामा हविष्पतिर्यजमानाय सचत.. ( ७०)
सविता देव, वरुण देव और भग देव ने इंद्र देव की इंद्रियों में बल धारण किया.
इंद्र देव ने हविपति की अच्छी तरह रक्षा की. यजमान की मनोकामनाएं पूरी कीं. ( ७० )
सविता वरुणो दधद्यजमानाय दाशुषे.
आदत्त नमुचेर्वसु सुत्रामा बलमिन्द्रियम्.. ( ७१)
सविता देव एवं वरुण देव ने यजमानों की प्रसन्नता हेतु धन और बल धारा.
इंद्र देव ने नमुचि राक्षस से रक्षा और बल तथा धन ले कर यजमानों को समृद्ध
बनाया. ( ७१ )
वरुणः क्षत्रमिन्द्रियं भगेन सविता श्रियम्.
सुत्रामा यशसा बलं दधाना यज्ञमाशत.. (७२)
यजमानों को क्षत्रियोचित बल और इंद्रियों की सामर्थ्य देने वाले वरुण देव
हमारे इस यज्ञ में पधारने की कृपा करें. सौभाग्य और ऐश्वर्यदाता सविता देव तथा
यश और बलधारी इंद्र देव हमारे इस यज्ञ में पधारने की कृपा करें. ( ७२ )
अश्विना गोभिरिन्द्रियमश्वेभिर्वीर्यं बलम्.
हविषेन्द्र १४ सरस्वती यजमानमवर्धयन्.. ( ७३)
अश्विनीकुमारों और देवी सरस्वती ने गायों, घोड़ों और हवियों से इंद्र देव और
यजमान के पराक्रम शक्ति और वैभव की बढ़ोत्तरी की. ( ७३ )
ता नासत्या सुपेशसा हिरण्यवर्तनी नरा.
सरस्वती हविष्मतीन्द्र कर्मसु नोवत.. (७४)
२६६ - यजुर्वेद