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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 265 of 421

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Page 265

पूर्वार्ध बीसवां अध्याय
उषासानक्तमश्विना दिवेन्द्र  सायमिन्द्रियैः.
सञ्जानाने सुपेशसा समज्याते सरस्वत्या.. (६१)
उषा, रात्रि, दिन और सायंकाल में इंद्र देव को अश्विनीकुमार देवी सरस्वती
के साथ विशेष बल से युक्त करते हैं. (६१)
पातं नो अश्विना दिवा पाहि नक्त  सरस्वति.
दैव्या होतारा भिषजा पातमिन्द्र  सचा सुते.. (६२)
हे अश्विनी देव! आप दिन में हमारी रक्षा करें. हे सरस्वती देवी! आप रात्रि में
हमारी रक्षा करें. वैद्य अश्विनीकुमार दिव्य होता हैं. वे सचेत सोम के द्वारा इंद्र देव
की रक्षा करें. (६२)
तिस्रस्त्रेधा सरस्वत्यश्विना भारतीडा.
तीव्रं परिस्रुता सोममिन्द्राय सुषुवुर्मदम्.. (६३)
तीन प्रकार से अश्विनी सरस्वती, भारती और इड़ा देवी ने तीव्रता से सोम को
इंद्र देव के लिए चुआया है. यह सोम ओषधि से युक्त हैं. (६३)
अश्विना भेषजं मधु भेषजं नः सरस्वती.
इन्द्रे त्वष्टा यशः श्रिय  रूप  रूपमधुः सुते.. (६४)
अश्विनी देव व सरस्वती देवी मीठी ओषधि हमें दें. त्वष्टा देव ने इंद्र देव हेतु
यश, शोभा, रूप, मधु और सोम को धारण किया है. (६४)
ऋतुथेन्द्रो वनस्पतिः शशमानः परिस्रुता.
कीलालमश्विभ्यां मधु दुहे धेनुः सरस्वती.. (६५)
इंद्र देव ऋतु के अनुसार वनस्पति और निचोड़ी हुई सामग्रियों से बढ़ोतरी को
प्राप्त हुए. अश्विनी देव और सरस्वती देवी ने गाय का दूध निकालने के समान इन
के लिए मधुर रस दुहे. (६५)
गोभिर्न सोममश्विना मासरेण परिस्रुता.
समधात  सरस्वत्या स्वाहेन्द्रे सुतं मधु.. (६६)
हे अश्विनीकुमारो! आप दोनों देवी सरस्वती, गाय के दूध के साथ व सोमरस
को ओषधियों के साथ मिलाइए. वह रस इंद्र देव को अर्पित कीजिए. वे इस आहुति
को भलीभांति ग्रहण करने की कृपा करें. (६६)
अश्विना हविरिन्द्रियं नमुचेर्धिया सरस्वती.
आ शुक्रमसुराद्वसु मघमिन्द्राय जभ्रिरे.. (६७)
सरस्वती देवी ने अश्विनीकुमार के साथ बुद्धिपूर्वक नमुचि राक्षस से हवि और
यजुर्वेद - २६५