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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 238 of 421

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Page 238

पूर्वार्ध अठारहवां अध्याय
हे अग्नि! आप स्वर्गलोक का आधार हैं. आप से स्वर्गलोक के बारे में पूछा
गया. आप से पृथ्वीलोक के बारे में पूछा गया. आप से विश्व की ओषधियों में
प्रवेश के बारे में पूछा गया. आप सब का कल्याण करने वाले हैं. हम साहस के
साथ आप से पूछते हैं कि आप कौन हैं. आप दिन में व रात्रि में हिंसा से हमारी
रक्षा कीजिए. ( ७३ )
अश्याम तं काममग्ने तवोती अश्याम रयि ᳲष रयिवः सुवीरम्.
अश्याम वाजमभि वाजयन्तोश्याम द्युम्नमजराजरं ते.. (७४)
हे अग्नि! आप हमारी सभी कामनाएं फलीभूत करें. आप हमें धनवान, श्रेष्ठ
वीर पुत्रों वाला, बलवान व धनवान बनाएं. हम आप से सदा अजर व अमर रहने
वाली द्युति ( कांति चमक ) पाएं. ( ७४ )
वयं ते अद्य ररिमा हि काममुत्तानहस्ता नमसोपसद्य.
यजिष्ठेन मनसा यक्षि देवानस्रेधता मन्मना विप्रो अग्ने.. (७५)
हे अग्नि! हम सब नमस्कार कर के आज आप के पास पहुंचते हैं. हम हाथ
ऊंचे कर के आप को नमस्कार करते हैं. हम यज्ञ में दत्तचित्त हैं. हम मन से आप
को हवि भेंट करते हैं. आप इस हवि को ब्राह्मणगणों तक पहुंचाने की कृपा
कीजिए. ( ७५ )
धामच्छदग्निरिन्द्रो ब्रह्मा देवो बृहस्पतिः.
सचेतसो विश्वे देवा यज्ञं प्रावन्तु नः शुभे.. (७६)
हे अग्नि! आप सब के धाम हैं. हे ब्रह्मा! हे बृहस्पति! आप सब के धाम हैं.
सभी देवगणों से अनुरोध है कि वे अच्छे मन से किए जा रहे यजमान के इस यज्ञ
को शुभ परिणति ( परिणाम ) प्रदान करने की कृपा करें. ( ७६ )
त्वं यविष्ठ दाशुषो नूं: पाहि शृणुधी गिरः. रक्षा तोकमुत त्मना.. (७७)
हे अग्नि! आप जौमय व दाता हैं. आप मनुष्यों की रक्षा करें. आप हमारी
वाणियां सुनने, हमारी संतान और हमारी रक्षा करने की कृपा करें. ( ७७ )
२३८ – यजुर्वेद