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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 207 of 421

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Page 207

सत्रहवां अध्याय
अश्मन्नूर्जं पर्वते शिश्रियाणामद्भ्य ऽ ओषधीभ्यो वनस्पतिभ्यो अधि सम्भृतं पयः.
तां न ऽ इषमूर्जं धत्त मरुतः स ष्ठ रराणा अश्मँस्ते क्षुन्मयि त ऽ ऊर्ग्यं द्विष्मस्तं ते
शुगृच्छतु.. (१)
हे मरुद्गण! आप हमें अन्न से ऊर्जस्वी बनाने की कृपा करें. आप पत्थरों,
ओषधियों, जलों व वनस्पतियों का बल धारिए. उन्हें और अधिक रसपूर्ण बनाइए.
आप अन्न धारिए. आप की क्षुधा शांत हो. आप का क्रोध उन लोगों पर हो, जो हम
से द्वेष रखते हैं. ( १ )
इमा मे अग्न ऽ इष्टका धेनवः सन्त्वेका च दश च दश च शतं च शतं च सहस्रं च
सहस्रं चायुतं चायुतं च नियुतं च नियुतं च प्रयुतं चार्बुदं च न्यर्बुदं च समुद्रश्च मध्यं
चान्तश्च परार्धश्चैता मे अग्न ऽ इष्टका धेनवः सन्त्वमुत्रामुष्मिँल्लोके.. (२)
हे अग्नि! ये इष्टकाएं ( हवि का सूक्ष्म भाग ) हमारे लिए मनोरथपूरक
कामधेनु की तरह हो जाएं. ये इष्टकाएं दस गुनी हो जाएं. दस से दस गुनी हो जाएं.
सौ की दस गुनी हजार हो जाएं. हजार की दस गुनी हो कर दस हजार हो जाएं.
अयुत ( दस हजार ) की गुनी हो कर नियुत ( लाख ) हो जाएं. नियुत की दस गुनी
हो कर प्रयुत ( दस लाख ) हो जाएं. प्रयुत की दस गुनी हो कर करोड़ हो जाएं.
करोड़ की दस गुनी हो कर दस करोड़ हो जाएं. दस करोड़ की दस गुनी हो कर
अरब हो जाएं. समुद्रसमुद्र की दस गुनी मध्य ( शंख पद्म ), मध्य की दस गुनी
अंत. अंत की दस गुनी हो कर परार्द्ध संख्या तक बढ़ती जाएं. हे अग्नि! इष्टकाएं
इस लोक और परलोक में हमारा कल्याण करें. ये इष्टकाएं हमारे लिए कामधेनु
की तरह हो जाएं. ( २ )
ऋतवः स्थ ऽ ऋतावृध ऽ ऋतुष्ठाः स्थ ऽ ऋतावृधः.
घृतश्च्युतो मधुश्च्युतो विराजो नाम कामदुघा ऽ अक्षीयमाणाः.. ( ३)
इष्टकाएं सत्य को स्थिर रखती हैं, सत्य की बढ़ोतरी करती हैं, इष्टका सत्य
में स्थित रहती हैं. इष्टकाएं सत्य में बढ़ोतरी करती हैं. ये घी व मधु चुआएं. ये
शोभित और कामनापूरक हों. कभी क्षीण न हों. ( ३ )
यजुर्वेद - २०७