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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 202 of 421

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Page 202

पूर्वार्ध सोलहवां अध्याय
के लिए नमन. शत्रुहंता के लिए नमन. शत्रुओं के हनन में लगे हुए के लिए नमन.
वृक्ष में स्थित के लिए नमन. हरे केश वाले व तारने वाले के लिए नमन. ( ४० )
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च
शिवतराय च.. (४१)
शंभु के लिए नमन. दोनों देवों के लिए नमन. शंकर के लिए नमन. मय के
लिए नमन. शिव व उन से इतर देव के लिए नमन. ( ४१ )
नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च
नमः शष्प्याय च फेन्याय च.. (४२)
समुद्र के इस पार वाले के लिए नमन. समुद्र के उस पार वाले के लिए नमन.
पार लगाने वाले के लिए नमन. तीर्थवासी के लिए नमन. तट पर स्थित के लिए
नमन. घास में स्थित के लिए नमन. समुद्र में फेन के लिए नमन. ( ४२ )
नमः सिकत्याय च प्रवाह्याय च नमः कि ᳪ शिलाय च क्षयणाय च नमः कपर्दिने च
पुलस्तये च नम ऽ इरिण्याय च प्रपथ्याय च.. (४३)
रेत में स्थित के लिए नमन. प्रवाह में स्थित के लिए नमन. पत्थर में स्थित के
लिए नमन. जल में स्थित के लिए नमन. कौड़ी, सीप आदि में स्थित के लिए नमन.
पुल में स्थित के लिए नमन. तिनकों और श्रेष्ठ पथ में स्थित के लिए नमन. ( ४३ )
नमो व्रज्याय च गोष्ठ्याय च नमस्तल्प्याय च गेह्याय च नमो हृदय्याय च निवेष्प्याय
च नमः काट्याय च गह्वरेष्ठाय च.. (४४)
चरागाह में स्थित के लिए नमन. बाड़े में स्थित के लिए नमन. शय्या में स्थित
के लिए नमन. घर में स्थित के लिए नमन. हृदय में स्थित के लिए नमन. कठिन राह
में स्थित के लिए नमन. काट कर बनाई गई गुफा व गह्वर ( गहरा ) में स्थित के
लिए नमन. ( ४४ )
नमः शुष्क्याय च हरित्याय च नमः पा ᳪ सव्याय च रजस्याय च नमो लोप्याय
चोलप्याय च नम ऽ ऊर्व्याय च सूर्याय च.. (४५)
सूखी लकड़ी में स्थित के लिए नमन. हरियाली में स्थित के लिए नमन. पुष्प
में स्थित के लिए नमन. धूल में स्थित के लिए नमन. अदृश्य में स्थित के लिए नमन.
दृश्य में स्थित के लिए नमन. उर्वर व अधिकाधिक में स्थित के लिए नमन. ( ४५ )
नमः पर्णाय च पर्णशदाय च नम ऽ उदुरमाणाय चाभिघ्नते च नम ऽ आखिदते च
प्रखिदते च नम ऽ इषुकृद्भ्यो धनुष्कृद्भ्यश्च वो नमो नमो वः किरिकेभ्यो देवाना ᳪ
हृदयेभ्यो नमो विचिन्वत्केभ्यो नमो विक्षिणत्केभ्यो नम ऽ आनिर्हतेभ्यः.. (४६)
२०२ - यजुर्वेद