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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 183 of 421

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Page 183

पूर्वार्ध पंद्रहवां अध्याय
लिए वर्षा को आनंदित करें. वसुओं के लिए वसुओं को आनंदित करें. प्रकाशवान
आदित्यों के लिए आदित्यों को आनंदित करें. (६)
तन्तुना रायस्पोषेण रायस्पोषं जिन्व स ँ४ सर्पेण श्रुताय श्रुतं जिन्वै
डैनौषधीभिरोषधीर्जिन्वोत्तमेन तनूभिस्तनूजिन्व वयोधसाधीतेनाधीतं जिन्वाभिजिता
तेजसा तेजो जिन्व.. (७)
हे इष्टके! तंतुओं से धन को पोसें. धन के लिए धन को पोसें. श्रुतियों के लिए
श्रुतियों से स्नेह रखें. ओषधियों के लिए ओषधियों को पुष्ट करें. उत्तम शरीर से
शरीर को पुष्ट करें. तेजस्विता के लिए तेजस्वी बनें. (७)
प्रतिपदसि प्रतिपदे त्वानुपदस्यनुपदे त्वा सम्पदासि सम्पदे त्वा तेजोसि तेजसे त्वा.. (८)
हे इष्टके! आप जीवन के मूल आधार हैं. आप अनुपद के अनुपद हैं. आप
संपत्ति की संपत्ति हैं. आप तेजोमय हैं. आप तेजों में तेज हैं. (८)
त्रिवृदसि त्रिवृते त्वा प्रवृदसि प्रवृते त्वा विवृदसि विवृते त्वा सवृदसि सवृते त्वा
क्रमोस्याक्रमाय त्वा संक्रमोसि संक्रमाय त्वोत्क्रमोस्युत्क्रमाय त्वोत्क्रान्तिरस्युत्क्रान्त्यै
त्वाधिपतिनोजौर्जं जिन्व.. (९)
हे इष्टके! आप त्रिवृत हैं. हम त्रिवृत के लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. आप
विवृत हैं. हम विवृत के लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. आप संवृत हैं. हम संवृत के
लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. आप अक्रम हैं. हम अक्रम के लिए आप को प्रवृत्त
करते हैं. आप संक्रम हैं. हम संक्रम के लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. आप उत्क्रम
हैं. हम उत्क्रम के लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. आप उत्क्रांत हैं. हम उत्क्रांत के
लिए आप को प्रवृत्त करते हैं. (९)
राज्यसि प्राची दिग्वसवस्ते देवा ऽ अधिपतयो॒ग्निर्हेतीनां प्रतिधर्त्ता त्रिवृत् त्वा स्तोमः
पृथिव्या ँ४ श्रयत्वाज्यमुक्थमव्यथायै स्तभ्नातु रथन्तर ँ४ साम प्रतिष्ठित्या ऽ अन्तरिक्ष
ऽ ऋषयस्त्वा प्रथमजा देवेषु दिवो मात्रया वरिम्णा प्रथन्तु विधर्त्ता चायमधिपतिश्च ते
त्वा सर्वे संविदाना नाकस्य पृष्ठे स्वर्गे लोके यजमानं च सादयन्तु.. (१०)
हे इष्टके! आप पूर्व दिशा की रानी हैं. दिशाओं के स्वामी आप सब के
पालनहार हैं. अग्नि सब के अधिपति हैं. आप त्रिवृत के प्रतिधारणकर्ता हैं. आप
त्रिवृत स्तोम को पृथ्वी पर स्थापित करने की कृपा करें. आज्य और उक्थ आप को
दृढ़ीभूत करने की कृपा करें. रथंतर साम आप को अंतरिक्षलोक में प्रतिष्ठित करने
की कृपा करें. ऋषिगण प्रथम उत्पन्न देव को देवों में प्रतिष्ठित करने की कृपा करें.
आप विशिष्ट धारणकर्ता व अधिपति हैं. अधिपति आप को विस्तृत करें. सभी देव
यजमान को स्वर्गिक सुख उपलब्ध कराने की कृपा करें. (१०)
यजुर्वेद - १८३