यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
by डा. रेखा व्यास
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपूर्वार्ध नौवां अध्याय
हे अग्नि! आप बलवान हैं. आप रथ में जुत कर वायु की तरह वेगवान बन
जाइए. आप इंद्र देव के दक्षिणी भाग की शोभा बढ़ाने की कृपा कीजिए. आप
को मरुद्गण रथ में जोतने की कृपा करें. त्वष्टा देव! आप पैरों में बल धारण
कीजिए. ( ८ )
जवो यस्ते वाजिन्निहितो गुहा यः श्येने परीत्तो अचरच्च वाते.
तेन नो वाजिन् बलवान् बलेन वाजजिच्च भव समने च पारयिष्णुः.
वाजिनो वाजजितो वाज ँ४ सरिष्यन्तो बृहस्पतेर्भागमवजिघ्रत.. (९)
हे बलशाली! आप हमें भी अपने बल से बलवान बनाइए. हमें अपना वह वेग
दे दीजिए जो आप के हृदय में है, श्येन पक्षी के उड़ने में है और वायु की गति में
है. आप हमें बलवान बनाइए ताकि हम शत्रुओं के पार जा सकें. हे अन्न जीतने
वाले! आप हमें बलदायी अन्न दीजिए. हम अन्न की चाह से बृहस्पति के भाग को
सूंघ सकें. ( ९ )
देवस्याह ँ४ सवितुः सवे सत्यसवसो बृहस्पतेरुत्तमं नाक ँ४ रुहेयम्.
देवस्याह ँ४ सवितुः सवे सत्यसवस ऽ इन्द्रस्योत्तमं नाक ँ४ रुहेयम्.
देवस्याह ँ४ सवितुः सवे सत्यप्रसवसो बृहस्पतेरुत्तमं नाकमरुहम्.
देवस्याह ँ४ सवितुः सवे सत्यप्रसवस ऽ इन्द्रस्योत्तमं नाकमरुहम्.. (१०)
सविता देव की कृपा से हम सत्य मार्ग पर चल सकें. बृहस्पति के उत्तम स्वर्ग
का आरोहण कर सकें. सविता देव की कृपा से हम सत्य मार्ग पर चल सकें. इंद्र
देव के उत्तम स्वर्ग का आरोहण कर सकें. सत्य उपजाने वाले सविता देव की कृपा
से हम बृहस्पति के श्रेष्ठ स्वर्ग में चढ़ गए. सत्य उपजाने वाले सविता देव की कृपा
से इंद्र देव के श्रेष्ठ स्वर्ग में चढ़ गए. ( १० )
बृहस्पते वाजं जय बृहस्पतये वाचं वदत बृहस्पतिं वाजं जापयत.
इन्द्र वाजं जयेन्द्राय वाचं वदतेन्द्रं वाजं जापयत.. (११)
हे बृहस्पति! आप विजय पाइए. हे यजमानो! आप बृहस्पति देव के लिए मंत्र
गाइए. आप व बृहस्पति देव को और अधिक बल मिल सके, इस के लिए जप
कीजिए. हे इंद्र देव! आप विजय पाइए. हे यजमानो! आप इंद्र देव के लिए मंत्र गाइए.
इंद्र देव को और अधिक बल मिल सके, इस के लिए आप जप कीजिए. ( ११ )
एषा वः सा सत्या संवागभूद्यया बृहस्पतिं वाजमजीजपताजीजपत बृहस्पतिं वाजं
वनस्पतयो विमुच्यध्वम्.
एषा वः सा सत्या संवागभूद्ययेन्द्रं वाजमजीजपताजीजपतेन्द्रं वाजं वनस्पतयो
विमुच्यध्वम्.. (१२)
हे वादको, वाद्य यंत्र बजाने वालो! आप एक साथ ऐसा स्वर निकालिए, जिस
यजुर्वेद - १०९