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यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

by डा. रेखा व्यास

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished421 pages

Page 104 of 421

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Page 104

पूर्वार्ध आठवां अध्याय
हे गौओ! इन यज्ञ करने वालों के प्रति आप की प्रीति बनी रहे. घी से भरी हुई
यह आहुति आप के लिए अर्पित है. आप इसे अपने लिए धैर्य से ग्रहण कीजिए. जगत्
को धारण करने वाली पृथ्वी माता के लिए जल धारण करें और उन के लिए उस
जल को बरसाएं. आप हमारे लिए पौष्टिक धन धारिए. आप के लिए स्वाहा. (५१)
सत्रस्य ऋद्धिरस्यगन्म ज्योतिरमृता ऽ अभूम.
दिवं पृथिव्या ऽ अध्यारुहामाविदाम देवान्त्स्वर्ज्योति:... (५२)
हे सोम! आप यज्ञ की समृद्धि करने वाले हैं. आप की कृपा से हम प्रकाशित
हों. आप की कृपा से हम अमरता पाएं. पृथ्वी से स्वर्गलोक तक आरोहण करें. हम
देवताओं के ज्योतिर्मय लोक को देखने में समर्थ हों. (५२)
युवं तमिन्द्रापर्वता पुरोयुधा यो नः पृतन्यादप तं तमिद्धतं वज्रेण तं तमिद्धतम्.
दूरे चत्ताय छन्तसद्गहनं यदिनक्षत्.
अस्माक १४ शत्रून्परि शूर विश्वतो दर्मा दर्षीष्ट विश्वतः.
भूर्भुवः स्वः सुप्रजाः प्रजाभिः स्याम सुवीरा वीरैः सुपोषः पोषैः.. (५३)
हे इंद्र देव! आप युवा, पर्वतवासी व श्रेष्ठ योद्धा हैं. आप शत्रुओं को पूरी तरह
तपाइए और उन पर वज्र से प्रहार करिए. आप हमें शत्रुओं द्वारा घेरे जाने व छिपाए
जाने से दूर ही रखिए. आप हमारे शत्रुओं पर सब ओर से आक्रमण कीजिए. आप
पृथ्वी, स्वर्ग आदि सब जगह व्याप्त हैं. आप हमें अच्छी व श्रेष्ठ पराक्रमी संतान
दीजिए. हमें वीर बनाइए और अच्छी तरह पुष्ट कीजिए. (५३)
परमेष्ठ्यभिधीतः प्रजापतिर्वाचि व्याहृतायामन्धो अच्छेतः.
सविता सन्यां विश्वकर्मा दीक्षायां पूषा सोमक्रयण्यामिन्द्रश्च.. (५४)
परमेष्ठी नामक यज्ञ में प्रजापति के लिए मंत्र से आहुति दी जा रही है. सोम के
लिए अंधसा नामक मंत्र से आहुति दीजिए. सविता देव के लिए उन के नाम से
आहुति दीजिए. विश्वकर्मा देव के लिए उन के नाम से आहुति दीजिए. पूषा देव के
लिए उन के नाम से आहुति दीजिए. (५४)
इन्द्रश्च मरुतश्च क्रयायोपोत्थितोसुरः पण्यमानो मित्रः क्रीतो विष्णुः शिपिविष्ट ऽ
ऊरावासन्नो विष्णुर्न्रन्धिषः.. (५५)
खरीद के लिए इंद्र और मरुत् को उन के नाम से आहुति दीजिए. खरीद के
लिए असुर के लिए उन के नाम से आहुति दीजिए. खरीदे हुए मित्र के लिए उन के
नाम से आहुति दीजिए. गोद में बैठे विष्णु के लिए उन के नाम से आहुति दीजिए.
अरु पर बैठे विष्णु के लिए नरंधिष मंत्र से आहुति दीजिए. (५५)
प्रोह्यमाणः सोम ऽ आगतो वरुण ऽ आसन्द्यामासन्नोग्निराग्नीध्र ऽ इन्द्रो हविर्धाने
थर्वोपावहियमाणः.. (५६)
१०४ - यजुर्वेद