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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

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भूमिका २५
इनके अनुसार-वस्तुतः जगत् की उत्पत्ति नहीं हुई, एकमात्र अखण्ड--
चिद्घन सत्ता ही मोहवश प्रपञ्चवत् प्रतीत हो रही है-
मनोदृश्यमिदं द्वैतमद्वैतं परमार्थतः।
मनसो ह्यमनीभावे द्वैतं नैवोपलभ्यते॥
न निरोधो न चोत्पत्तिर्न बद्धो न च साधकः।
न मुमुक्षुर्न वै मुक्त इत्येष परमार्थता॥
अर्थात् उत्पत्ति, प्रलय, बद्धता, साधकत्व, मुमुक्षत्व एवं मुक्तभाव ये सभी
परमार्थ नहीं हैं। जिसप्रकार रज्जु में सर्प, सीपी में चांदी तथा स्वर्ण में
आभूषणों की प्रतीति होती है, ठीक उसीप्रकार माया की महिमा द्वारा
सर्वसङ्गशून्य निर्विशेष चित् तत्त्व में ही समस्त पदार्थों की प्रतीति हो रही है।
अतः एकमात्र वही वस्तु सत् एवं परमार्थ है।
(२०) आचार्य गोविन्दपाद-ये आचार्य गौडपाद के शिष्य तथा
शङ्कराचार्य के गुरु थे। शङ्कराचार्य की जीवनी से केवल इनका नर्मदातट-
निवासी होना सिद्ध होता है। ये अपने समय के उद्भट विद्वान् थे। इनका
कोई ग्रन्थ उपलब्ध नहीं होता है।
(२१) शङ्कराचार्य एवं उत्तरवर्ती वेदान्ताचार्य-शङ्कराचार्य को
अद्वैतवाद का प्रवर्तक आचार्य माना जाता है। अद्वैतमत को शाङ्करमत या
शाङ्करदर्शन भी कहते हैं। ब्रह्मसूत्र पर उपलब्ध भाष्यों में सर्वाधिक प्राचीन
शाङ्करभाष्य माना जाता है। आचार्य शङ्कर की प्रामाणिक जीवनी का कहीं
भी उल्लेख नहीं मिलता, किन्तु परवर्तीकाल में उनके जीवन की घटनाओं
का कहीं-कहीं संकलन किया गया है। जिनमें आनन्दगिरि की
शङ्करदिग्विजय, चिद्विलास की शङ्करविजय तथा माधवाचार्य की संक्षिप्त
शङ्करजय मुख्य हैं। इन्हीं ग्रन्थों के आधार पर हम उनके विषय में यहाँ
विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं-
शङ्कराचार्य का जन्म केरल प्रदेश की पूर्णा नदी के तटवर्ती ग्राम कलादी
में वैशाख शुक्ल 5 को 788 ई० में हुआ। इनके पिता का नाम शिवगुरु
तथा माता का नाम सुभद्रा था। भगवान् शङ्कर की आराधना से पुत्रप्राप्ति
होने के कारण उन्होंने इनका नाम भी शङ्कर रखा। बालक शङ्कर
बाल्यावस्था से ही अद्भुत प्रतिभा एवं स्मरणशक्ति के धनी थे अतः सात
वर्ष की अवस्था तक इन्होंने वेद, वेदान्त और वेदाङ्गों का विधिवत् अध्ययन