Skip to content
SarvaKosh
वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 214 of 314

Read in context
Page 214

२०० वेदान्तसार
स्थूलभूतानि तु पञ्चीकृतानि। पञ्चीकरणं त्वाकाशादिपञ्चस्वेकैकं द्विधा
समं विभज्य तेषु दशसु भागेषु प्राथमिकान्पञ्चभागान्प्रत्येकं चतुर्धा समं
विभज्य तेषां चतुर्णां भागानां स्वस्वद्वितीयार्धभागपरित्यागेन भागान्तरेषु
संयोजनम्। तदुक्तम्-
“द्विधा विधाय चैकैकं चतुर्धा प्रथमं पुनः।
स्वस्वेतरद्वितीयांशैर्योजनात्पञ्चपञ्च ते” इति॥
पदच्छेद- स्थूलभूतानि तु पञ्चीकृतानि। पञ्चीकरणम् तु-आकाशादि
पञ्चसु एकैकम् द्विधा समम् विभज्य तेषु दशसु भागेषु प्राथमिकान्
पञ्चभागान् प्रत्येकम् चतुर्धा समम् विभज्य, तेषाम् चतुर्णाम् भागानाम्
स्व-स्वद्वितीय-अर्धभाग-परित्यागेन भागान्तरेषु संयोजनम्। तद् उक्तम्-
अन्वय- “प्रथमम् (प्रत्येकम्) द्विधा विधाय, पुनः एक-एकम् चतुर्धा
(विधाय) स्व-स्व-इतर द्वितीयांशैः योजनात् ते पञ्च-पञ्च एव भवन्ति।”
अनुवाद-पञ्चीकृत (महाभूतों) को ही स्थूलभूत (कहा जाता है)।
पञ्चीकरण तो (वह है जिसमें) आकाश आदि सूक्ष्मपञ्चभूतों में से प्रत्येक
को दो भागों में बराबर विभाजित करके, उन दस भागों के, प्रथम पञ्च
भागों में से प्रत्येक को पुनः चार बराबर भागों में विभाजित करके, उन चार
भागों को अपने-अपने द्वितीय अर्धभाग को छोड़कर दूसरे भागों में मिलाया
जाता है। इसीलिए कहा भी गया है-
सर्वप्रथम (प्रत्येक सूक्ष्मभूत को) समान दो भागों में विभाजित करके,
तत्पश्चात् (प्रथम पाँच में से) प्रत्येक को चार भागों में विभक्त करके,
अपने-अपने अंश को छोड़कर, अन्य भूतों के अर्धांश के साथ जोड़ने से वे
पाँच (सूक्ष्मभूत) पाँच (स्थूलभूत) हो जाते हैं।
'चन्द्रिका'-यहाँ तक ग्रन्थकार ने अपञ्चीकृतसूक्ष्मभूतों से सूक्ष्मप्रपञ्च
की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक कथन किया। तदनन्तर स्थूलप्रपञ्च की उत्पत्ति
के प्रतिपादन का उपक्रम करते हैं, किन्तु इससे पूर्व वेदान्त के महत्त्वपूर्ण
सिद्धान्त पञ्चीकरण की प्रक्रिया को कहते हैं, क्योंकि सम्पूर्ण स्थूल प्रपञ्च
की उत्पत्ति पञ्चीकृतमहाभूतों द्वारा ही होती है। तदनुसार-
पञ्चीकरण प्रक्रिया-आकाश आदि सूक्ष्मभूतों के सर्वप्रथम दो-दो भाग
किए जाते हैं। इसप्रकार प्राप्त हुए दस भागों में से प्रथम पाँच भागों को
पुनः चार-चार भागों में विभाजित किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप एक