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वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary

by सदानन्द योगीन्द्र

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished314 pages

Page 124 of 314

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Page 124

११० वेदान्तसार
सभी उपनिषद् एवं वेदान्तग्रन्थ ब्रह्म के लिए आनन्द का प्रयोग करते हैं।
इस सम्बन्ध में तैत्तिरीयोपनिषद् कहता है कि-सभी प्राणी आनन्द से उत्पन्न
होते हैं, आनन्द में स्थित हैं तथा अन्त में आनन्द में ही उनका लय भी हो
जाता है-
आनन्दाद्धयेव खल्विमानि भूतानि जायन्ते। आनन्देन जातानि जीवन्ति।
आनन्दं प्रयन्त्यभिसंविशन्तीति (तैत्तिरीयोपनिषद्-3/6)
ब्रह्म वस्तुतः आनन्दस्वरूप है (अन्योऽन्तर आत्मानन्दमयः)। यह सभी के
अन्तरतम में विद्यमान रहता है। इसप्रकार यहाँ प्रयुक्त सत्, चित् और आनन्द
ये तीनों पद ब्रह्म की अनेक विशेषताओं का कथन करते हुए उसकी महिमा
को कहते हैं।
(ख) अवाङ्मनसगोचरम्-यह आत्मतत्त्व ज्ञानेन्द्रियों के प्रत्यक्षज्ञान का
विषय नहीं है। यहाँ तक कि सर्वत्र गतिवाला मन भी उस तक पहुँचने में
समर्थ नहीं है और यदि कोई साधक उसे योग आदि क्रियाओं द्वारा जान भी
लेता है तो उसकी वाणी उसका कथन करने में समर्थ नहीं है। इसीलिए
उसे गूँगे का गुड़ कहा गया है। जिसप्रकार गूँगा व्यक्ति गुड़ के स्वाद को
कहने में असमर्थ रहता है, वह उसका केवल अनुभव कर सकता है। ठीक
उसीप्रकार उस परमब्रह्म का दर्शन करने पर भी साधक उसका वर्णन करने
में असमर्थ रहता है। इसी अभिप्राय को केनोपनिषद् इसप्रकार प्रदर्शित करता
है-
न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग् गच्छति नो मनः।
न विद्मो न जानीमो यथैतदनुशिष्यात्॥ (केनो०-3)
अर्थात् ब्रह्म अविज्ञेय है, किन्तु इसका यह अर्थ भी नहीं लेना चाहिए
कि उसकी सत्ता नहीं है, अपितु उसकी सत्ता अवश्य है। योगविद्या एवं
सद्गुरु के उपदेश से उसका साक्षात्कार किया जा सकता है। वह केवल
अनुभव का विषय है। सम्भवतः इसीकारण उपनिषदों में 'नेति नेति' कहकर
उसके स्वरूप का प्रतिपादन किया गया है। इस विषय में बृहदारण्यकोपनिषद्
कहता है- 'स एष नेति नेत्यात्मा (3/9/26)। यहाँ नेति नेति का अभिप्राय
'ब्रह्म के अतिरिक्त कुछ नहीं है', यह ग्रहण करना चाहिए। वस्तुतः इस
विशेषण द्वारा ब्रह्म को अविज्ञेय एवं अकथनीय कहा गया है।