वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
पृष्ठ 2, कुल 648 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका
✻ ✻ ✻ ✻ न १९१५ ई० में, हमारे यहाँ से महाराज भर्तृहरिके ✻ ✻ ✻ ✻
✻ स ✻ “नौतिशतक” का अनुवाद छप कर प्रकाशित हुआ ✻ ✻ ✻ ✻
✻ ✻ ✻ ✻ था। तभी से हमारी इच्छा थी, कि “वैराग्य-
शतक” का भी अनुवाद प्रकाशित किया जाय। इसके अनुवाद
के लिए, हमने कई योग्य विद्वानोंसे लिखा-पढ़ी की, किन्तु
वादा करने पर भी, गत मार्च तक, किसी विद्वान् सज्जनने ऊप्रा
“नहीं की। उधर हमारे प्रेमी ब्राह्मणोंने इसके लिए तकाज़े करने
शुरू किये; तब हमने “अकरणान्मन्द करणं श्रेयः” के न्याया-
नुसार, इसके अनुवाद करने का स्वयं दुःसाहस किया। यद्यपि
हम स्वयं अच्छी तरह जानते हैं, कि हम न तो किसी भाषाके
विद्वान् हैं और न हिन्दुके ही नामी-गिरामी लेखक हैं; पर
सर्वसाधारण हमारी लिखी पुस्तकोंको भाषा और शैलीको
पसन्द करते हैं, हमारी लिखी पुस्तकोंको चाहते खरीदते हैं,
इसी बल-भरोसे पर हमने बौनेकी तरह चाँद छूनेका प्रयास
किया है। कह नहीं सकते, हमें कहाँ तक सफलता हुई है।
सम्भव है, इसमें अनेक त्रुटियाँ रह गई हों; क्योंकि हमने यह