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तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)

Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi

by सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत')

DevanagariHindipublished334 pages

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8 भूमिका
कविवर की अर्द्धांगिनी के अवसान के समय की एक अद्भुत घटना अति
प्रसिद्ध है । मृत्यु-शय्या पर लेटी हुई वासुकी को अपनी ओर असाधारण रूप से
चिन्तामग्न नेत्रों के साथ अवलोकन करते हुए देखकर तिरुवल्लुवर ने उसका
कारण पूछा । वासुकी ने सविनय उत्तर देते हुए अत्यन्त मृदुल स्वर में कहा—
' विवाह के उपरान्त प्रथम भोज के समय ही आपने मुझे एक आज्ञा दी थी कि
भोजन के समय एक सूई और एक छोटे पात्र में स्वच्छ जल रख दिया करो—
और मैं वैसा करती आयी । पर मैं उसका मर्म अभी तक न समझ सकी
क्योंकि आपने कभी उनका प्रयोग नहीं किया ।' तिरुवल्लुवर ने उत्तर दिया—
" वे इसलिए कि यदि कोई चावल का कण पृथ्वी पर गिर पड़े तो सूई से
उठाकर स्वच्छ जल में शुद्ध कर लिया करूँ ।" उत्तर से सन्तुष्ट हो वासुकी
स्वर्ग सिधारी । इनसे इतना अवश्य सिद्ध होता है कि तिरुवल्लुवर के आदर्श
महान् थे और प्राचीन तमिऴ संस्कृति का स्तर अत्यन्त श्रेष्ठ था ।²
विद्वानों का विचार है कि तिरुवल्लुवर ईसा की द्वितीय शताब्दी में
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