तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा
पृष्ठ 18, कुल 334 में से
संदर्भ में पढ़ेंvi
अध्याय पृष्ठ
५३. बन्धुओ की उपेक्षा न करना ... ... 131
५४. अविस्मरण ... ... 133
५५. सुशासन ... ... 135
५६. कुशासन ... ... 137
५७. भयकंपित न करना ... ... 139
५८. दयार्द्रता ... ... 141
५९. गुप्तचर ... ... 143
६०. उत्साह ... ... 145
६१. निरालस्य ... ... 147
६२. कार्य-कुशलता ... ... 149
६३. दुःख में अधीर न होना ... ... 151
२. सामन्त .... .... 153
६४. मन्त्रित्व ... ... 153
६५. वाक् शक्ति ... ... 155
६६. व्यवहार-विशुद्धि ... ... 157
६७. कर्म की दृढ़ता ... ... 159
६८. कर्म करने की रीति ... ... 161
६९. दूत ... ... 163
७०. सम्राट् से सहयोग ... ... 165
७१. भावज्ञता ... ... 167
७२. सभा को समझना ... ... 169
७३. सभा में निर्भीकता ... ... 171
३. दुर्ग 173
७४. राज्य ... ... 173
७५. दुर्ग ... ... 175
४. खाद्य .... .... 177
७६. धन-बल निरूपण ... ... 177
५. सैन्य .... .... 179
७७. सैन्य-सौष्ठव ... ... 179
७८. सैन्य-शौर्य ... ... 181