तिरुक्कुरळ् (सन्त तिरुवल्लुवर - तमिल वेद / उत्तरवेद: धर्म, अर्थ एवं काम सविस्तार हिन्दी भाषान्तर)
Tirukkural of Saint Tiruvalluvar in Hindi
सन्त तिरुवल्लुवर (अनुवादक: खेमानन्द 'रहत') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्राक्कथन
अत्युत्तम तमिऴ काव्य-ग्रंथों में से एक अतिविशिष्ट ग्रंथ है तिरुक्कुरळ।
तिरुक्कुरळ में उस संत तिरुवळ्ळुवर के नीति-वाक्य हैं जो सर्वश्रेष्ठ कवियों तथा
दार्शनिकों में से एक माने जाते हैं और प्रथम शताब्दी इस्वी के लगभग
जीवित थे। तिरुवळ्ळुवर का संदेश जैसा कि तिरुक्कुरळ में उल्लिखित है, मानव
मात्र के लिये एक महान संदेश है, और उसकी आवश्यकता आज से अधिक
और कभी नहीं रही। इस ग्रंथ के गौरव की प्रशंसा सभी देशों के श्रेष्ठ
विद्वान कर चुके हैं, और इसका अनुवाद अनेक भाषाओं में हो चुका है
जिनमें से प्रधान हैं लैटिन, जर्मन, अंग्रेज़ी तथा फ्रैंच।
श्री शंकर राजू नायुडू ने जो मद्रास विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के
अध्यक्ष हैं, इस महान ग्रंथ का अनुवाद मूल तमिऴ से हिन्दी में प्रस्तुत किया है
जिसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं। जब कि पाश्चात्य देशों के महान
विद्वानों को प्राचीन तमिऴ साहित्य भंडार के अमूल्य काव्य-ग्रंथों का अधिक
परिचय प्राप्त है और वे इनका सम्मान करते हैं, भारत के अन्य भागों के
मान्य विद्वानों का ध्यान ऐसे ग्रंथों की ओर बहुत कम गया है, यह दुर्भाग्य की
बात है। आशा की जाती है कि यह प्रयास जो एक ऐसे व्यक्ति का है
जिनको तमिऴ एवं हिन्दी दोनों में अच्छी विद्वत्ता प्राप्त है, सभी मान्य विद्वानों
से सम्मानित होगा।
यूनिवर्सिटी बिल्डिंग्स, }
चेपाक, मद्रास-५ } ए. एल. मुदलियार
२-५-१९५८ } वाइस चान्सलर