Skip to content
SarvaKosh
तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

Page 9 of 118

Read in context
Page 9

जब सभा भवन में सभी सभासद पहुँच गए तब तेनाली राम ने कहना आरम्भ किया,
“महाराज! आपके निर्देश पर कल मैंने एक प्रयोग किया और प्रयोग का परिणाम मुझे आज
मिल गया। यह सूचना-पत्र, जो राज्य कोषागार से मँगाया गया है, वह एक गरीब व्यक्ति के
ईमानदार होने का प्रमाण-पत्र है। यह सूचना-पत्र बताता है कि गरीब आदमी धन-लोलुप
नहीं होता है।” फिर तेनाली राम ने सविस्तार अपनी योजना के क्रियान्वयन की कथा सभा
भवन में सुनाई। प्रमाण के रूप में दोनों प्रहरियों को प्रस्तुत किया।
दोनों प्रहरियों ने सभासदों को सम्पूर्ण घटना की जानकारी दी।
महाराज ने सिपाहियों को भेजकर सेठ गिरधारी लाल को पकड़वाकर मँगवाया। पहले
तो सेठ इस घटना को ही गलत बताता रहा लेकिन जब तेनाली राम ने उससे कहा कि सौ
स्वर्णमुद्राओं से भरी थैली तुमने अपने कमरे की दीवार में लगी तिजोरी में रखी है तब वह
सेठ टूट गया और अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
महाराज ने सिपाहियों को भेजकर स्वर्णमुद्राएँ मँगा लीं और उसे राज्य कोषागार को
सौंप दिया गया। सेठ गिरधारी लाल को महाराज ने जेल भिजवा दिया। गरीब रामानुजम्
को दरबार में बुलाकर सौ स्वर्णमुद्राएँ उसकी ईमानदारी के पुरस्कारस्वरूप प्रदान कीं।
इसके बाद महाराज ने तेनाली को अपने गले से लगा लिया और कहा, ”सचमुच तेनाली
राम! तुम्हारी मेधा का कोई दूसरा उदाहरण मैंने कहीं नहीं देखा।“