तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकर दीं। मगर तेनाली राम इस सभासद की बातों में छुपे कटाक्ष से तिलमिला गया और
तत्काल अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “माननीय सभासद! यदि महाराज ने मुझे
यह चूहा उपहार में दिया तो मैं इसे आदर के साथ ग्रहण करूँगा। ऐसे भी चूहा विकल्पों का
प्रतीक है। भगवान गणपति का वाहन ऐसे ही नहीं बन गया है।”
महाराज तेनाली राम के प्रतिवाद पर मुस्कुरा उठे और बोले, “मरे चूहे का तुम क्या
करोगे?”
“यदि आपने मुझे यह चूहा भेंट किया तब मैं यह समझूँगा कि आप मेरी बुद्धि की
परीक्षा लेना चाहते हैं और यह परीक्षा देने के लिए मैं इस चूहे से व्यापार करूँगा
महाराज!” तेनाली राम ने कहा।
“मरे चूहे से व्यापार? यह तुम कैसे कर सकते हो तेनाली राम?” महाराज ने पूछा।
“महाराज! संसार की प्रत्येक वस्तु का कोई-न-कोई उपयोग है। कोई भी वस्तु व्यर्थ नहीं
है। मैं इस मरे चूहे को किसी सपेरे को बेच आऊँगा और उससे गुड़ खरीद लूँगा। इन दिनों
गर्मी का मौसम है। मैं उस गुड़ को पानी में मिलाकर मीठा पानी बेचूँगा। मीठा पानी
बेचने से जो पैसे मिलेंगे उससे चना खरीदूँगा और चना बेचकर, चना से बने पकवान, सत्तू,
गुड़चना आदि बेचकर अच्छा पैसा कमाउँगा और उन पैसों से कोई बड़ा रोजगार आरम्भ
करूँगा।” तेनाली राम ने कहा।
महाराज तेनाली राम की बातें सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और सभासदों से कहा, “तेनाली
राम की यही तर्कबुद्धि उसे तेनाली राम बनाती है। ऐसी तर्कबुद्धि आम इनसान में प्रायः
दुर्लभ है। हमें इस बात का गर्व है कि हमारे दरबार में तेनाली राम जैसा बुद्धिमान सभासद
है। मैं आज इसके उत्तर से इतना सन्तुष्ट हूँ कि इसके लिए ‘स्वर्ण मूषक’ पुरस्कार की
घोषणा करता हूँ तथा राज्य के कोषाध्यक्ष को आदेश देता हूँ कि तेनाली राम को
पुरस्कृत करने के लिए पाँच तोले सोने का चूहा बनवाकर दरबार को यथाशीघ्र सौंपे!”
महाराज के इस आदेश का पालन हुआ।
उस दिन दरबार में महाराज ने तेनाली राम को सोने का चूहा पुरस्कार में देकर उसे
अपने गले से लगा लिया।
तेनाली राम के आलोचकों को महाराज की ओर से दिया गया यह एक करारा जवाब था।