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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

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विज्ञान)

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(स्वरोदय विज्ञान)

जैसों बल अपने तन पावै, सो तैंसों वह भार उठावै।
जेतो साधन सों मन लावै, ते तौ लाभ दास हूं पावै।
बोले शंकर सुनो भवानी, यह साधन की गति जु बखानी।
जोगी सावधान जो साथै, ब्रह्म लीन होइ लाइ समाधै।
चालीस दिन बितीत जब होई, अलख चिन्ह पुनि देखै सोई।
यामैं कछु संदेह न जानों, जो हम कहौ साचु करि मानौं।

पार्वत्युवाच

गौरी कहै सुनों जगदीसा, हंसासन साथै जु गुनीनों।
ताकौ भेद नहीं हम जानों, मो पर होइ कृपाल बखानौ।

अथ हंसानन-विधि

श्री शिव उवाच

सिर अरु पृष्ठ कटिहि सम राखै, पिडुरी पर पिडुरी गुरु भाखै।
बाये पग की ऐडी जोई, दक्षिण जानु राखियै सोई।
दक्खिन जानु सु बाँई जानौ, बहुरौ नाम जपौ मन मानौ।
निर्गम स्वर सो हंस कहावै, नाम जु हंस प्रवेस जु पावै।
हंस जु आतम करि पहिचानौ, जो सुहंस परमाल्मा मानौ।
जो इनि दुहुनि एक करि राखै, नाम निरंजन सो रस चाखै।
लहै निरंजन अनुभव जागै, व्याधि मलिनता जड़िता भागै।
जो इहि भांति साधि चित्त लाबै, परम हंस की पदवी पावै।

इति हंसानन

पार्वत्युवाच

सुनिये शब्द अनाहद कैसैं, शिवा कही जब सिव सों ऐसैं।