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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

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(स्वरोदय विज्ञान)

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लैं वृक्ष ते जू अरसी सुमन कों, लै नाम ताकौ थिर राखि मन कौ।
सो लैं नदी में तेहि नाम डारे, तौ होइ किरपाल रोसे निवारे।
नाडी इडा में यह रीति ठानै, तो सिद्धि होई साँची बखानै।
ता पाँइ तल की लै मृतिका कौ, बहे सूर्य नाडी जेहि काल जाकौ।
सो सात चुटकी उन्मान कीजै, लै और माटी तेहि माँहि दीजै।
ता द्वार पै मंडलै खँचि आवै, सो बीच ताके तेहि काल घावै।
गई मित्र ताकौजु या विधि करै जु, सुरजान ज्ञानी सु यों उच्चरैजू।
जो बाम कौ तौ पग बाम जानौ, जो पुरिष होई दाहिनों बखानी।
नाडी ससी की कछु लै सुगंधे, याकौ जु दीजै सो प्रीति बंधे।

इति डर की उपाय

अथ रोस कौ उपाउ

जो कोउ रुठौ कबहूँ न मानै, ताहेत भेदी भेदहि बखानै।
रात्रैस नाडी पुनि वार ताकौ, पीपर की डारी लै आव जाकौ।
सप्तोंगुरी है परमान जाकौ, सो आपने जू तुम पास राखौ।
बायँ जु जावै जब फेरि आवो; दै पाऊँ वायौ तहाँ बैठि जावो।
ताके तरे देहिरि ताहि गाडै, जो मैं बताऊँ मत कोंन छाडै।
सो आपु मानो कछु संस नाही, ज्ञानी बखानौ धरिचिन्त मांही।

इति रोस की उपाउ

अथ जिभ्या - स्थंमन विधि

जौ मौम के जू लैं सात टूकै लै सूर्य नाडी मुख मांही मूकै।
मुख ही में गोलीजो बांधि लीजै, ताकौ सुध्यानैमन माँहि कीजै।
ताकीसु जिभ्या बँधि जाइ जानौ, भाषी सु ऊनो कबहूँ न मानौ।
जे हेत की रीति तु सो बखानी, अन हेत हूँ की सुनियै भवानी।