Skip to content
SarvaKosh
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

Page 68 of 94

Read in context
Page 68

ज्ञान

(स्वरोदय विज्ञान)

(५१)

वामें इडा जु नाड़ी ससि की, सो थिर सित सम कहिये।
पुनि गिरिजा त्रिय संज्ञा ताकी ताहि समझि सुख लहिये।
दक्षिण नाड़ी पिगिल रवि की, विषम असित चर जानौ।
संज्ञा ताहि पुरुष की कहियै, सत्य वचन मन मानौ।
जब सुर सरे चंद्र नाड़ी में, सौम्य कार्ज सब करियै।
सूरज नाड़ी बहै जा समैं, रौद्र कर्म अनुसरियै।
तब स्वर चलै सुषमना पूरन, मुक्ति लाभ अति जानौ।
तीनि स्वरूप पान एकै गत, क्रम-क्रम ते सब मानो।
बीस अरु एक सहस्त्र सिवाजू, पुनि षट सत अधिकाई।
निस दिन स्वास चलत प्राननि कै, यौ गुर जुगति बताई।
रहे एक स्वर पांच घरी लौ, जानत है स्वर ज्ञानी।
एक सहस्त्र आठ से स्वासा, तिहि स्वर चले भवानी।

तत्त्व वर्णत्र

पांच तत्व मुनि पांच घरी में, चलै सु निहचै जानौ।
तिनि के रूप भेद गुन भाषौ, भिन्न-भिन्न पहिचानौ।
पहिलौ तत्व प्रथी तब जानौ, पीत वर्ण सो कहिये।
द्वादस आँगुर तेहि परमाना, जाहि मध्य गति लहियै।
दूजौ तथ्य नीर पुनि कहियै, उज्जल वरण बखानौ।
तेहि परमान सु षोडस आंगुर ताहि अधोगति मानौ।
तत्व तीसरौ अग्नि बखानो, चतुरंगुल परमाना।
ऊर्ध्व गति अरु रक्त वरण है, जानत जाहि सुजाना।
चौथी वायु तत्व है, जाकी गति तिरछौहीं कहियै।
अष्टांगुल परमान सु जाकौ, हरित वरन जिहि लहियै।
पंचम सो नभ तत्व बखानौ, नील वरण जेहि जानौ।
कछुक स्वेत तास मैं मानौ, अंतर गति पहिचानौ।
सुर अरु नाड़ी भेद जिते ये, कहे सकल तुम पाही।