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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

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(स्वरोदय विज्ञान)

(४९)

आठ दिन में कालु अपनी जानिजै कै कछु अनर्थ को ढका लगे।

अथ युद्ध कीवे की विधि

दोई अनी जुरी होई तो कोउ पूछै। पूरन सुर होइ तौ प्रथम नाम लेइ सु जीतै। वैरी के दाहिने सुर जईयै शत्रु की फौज की तरह सुन्न सुर राख युद्ध कीजै। जो सूरज बहै तो पूरब—उत्तर दिसा लीजै तो पांच असवार सो जीत आवै। अरु चन्द्र होइ तौ दक्षिण—पश्चिम दिसा लीजै तो पांच असवार सो जीतै। अरु ओर दिसा होइ तो भैय देखै।

पृथ्वी तत्व में चारों दिसि गबन कीजै तो सुभ है। अग्नि तत्व में दछिन दिसा लीजै। जल तत्व में पछिम दिसा लीजै। वायु तत्व में उत्तर दिसा लीजै। दाहिनीं साम्हीं पाछै चलतु सूरज घर जानिये। बाम बैठी, ऊचौ, नीचौ चार घर चन्द्र जानियै।

चन्द्र होई तौ चन्द्र घर पुछै तौ कारज सिद्ध होई। सुरज सुर होइ सूरज घर पुछै तौ विलंब कहि फल सिद्ध होइ। सुज सुर में चंद्र घर चंद्र होइ तौ पुत्र होइ।

वायु तत्व में जनमु होई तौ जोगी होइ, कै तीरथ यात्रा दिस तरी होइ। अग्नि तत्व में होइ तो थोरे दिन जीवैं। रोगी होइ, आकाश में होत ही मरै। जल तत्व में जसी भोगी होइ। पृथ्वी तत्व में राजा के साहु होई। जौं कोउ पूछै कैं या कैं कह बालक हुहै तौ सूरज सुर बहै तौ पुत्र कहियै। चन्द्रमा बहै तो कन्या। वहै तौ अंगुर आठ।

आकाश तत्व के भेद

वरन कारी। स्वादहीन। सब तै निआरी। जात हीन मूर्तहीन। प्रमानहीन। मुक्ति कौ दाता है। आकाश में सब कारज निरफल है। पनुमेसुर को भजनु करै, जो निकसत स्वासा बीज परै, तौ थोरी आरवल तरवर की होई। स्वासा सरीर में होइ तो बड़ी आरवल होई। और जो पुरिष की सुरज सुर होई तो अस्त्री को पूछे तो अंतर विलवु जानियै। चन्द्र सुर होई सुज घर पूछे तौ