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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)

Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)

Devanagarihipublished94 pages

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(स्वरोदय विज्ञान)

और सरदी गरमी देही में होई तो जतन करै। दोनों सुरन में ठैंठा दे के मुख होके वायु काढे और चतुर विला छन होई।

जोगी होई सुर साथे होई। अरोगी और बुधि जीते तो इतवार के दिन से अपने वार बनवावै दाहिने सुर में और एक अंगोछा में धरि लेई गिरन न देई जिमी में आर जानी कि आधी रात भई। तब धूनि लेई वारन की और सूहागी मिलावे तो सभा जीत होइ। बुधि पावै और झाड़े को दाहिने सुर में जाई और पेसाब को डेरे सुर में जाई।

इस्त्री गमन दाहिने सुर में करै तो पुत्र लाभ होई और स्त्री प्रसन्न होई। कन्या कबहु न होवै और सुर देख के कौन हूँ काम करै। तौ देवतन कौ विचारै तौ देवतन को दरबार करै तीसरी बरस नौ नाथ की दरबार करै और कछू मतो पावे और जे काल बस जाने है ते सब मोहे और सब अपने पास आवै। डराइ नहिं हितु करै और सुर को विचार हमेश करता रहै। तो प्रथम सकल सुख देखै। तुरत होई सो जानी जाय और जितने पृथ्वी पर हथियार है ते न लगे। काल को जीतै और कहीं को चलै तो दिसा विचार लेई। दाहिनी सुर होइ तौ दाहिने पैड़े तीन देके आगे चले। पूर्व उत्तर दिन राति फिरवे करै। मन चीजे कारज करै। कुछ सन्देह नहीं है।

और डेरी सुर होई तो डेरे पेड़ा चार आगे धरै। दक्षिण पछिम को तौ दिन रात फिरवै करै। अपनी कारज करै तौ मन मोहन फल पावै। और दोऊ सुर चलते हों सुषुमना तौ कछू कारज न करै। आर तत्त्व को भी विचार कहुँ न जाय घर बैठो रहै तो सुषुमना होई असुभ शुभ देखै। आर शनीश्चर के दिना डेरी सुर चलै तौ जानिये कि देश में उपद्रव होई है और तीन शनीश्चर डेरी सुर चलै तो जानियै कि जालिम आवै देसा उजारु होई। वजाय चाहे तो देस के कुता खवावै। देश की चीटीन को चुगावै। नगर की गैलें सिचावै झरावै और दीपन करावै ता देस में जालम न आवै, मुराकि जावै। राजा की फते होई। और शुक्रवार के उदैं में दाहिनी सुर चलै तीन शुक्रतो तीन महिला में काल आवै राजा को। और बचाये चाहैं तो उपाय करै।