स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
by श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर)
Source: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (origin)
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स्वर बदलने की विधि
पहली विधि -
जो स्वर चलाना चाहो, उसके विपरीत करवट बदल कर लेट जाओ। थोड़ी देर में स्वर बदल जावेगा। उदाहरणार्थ यदि सूर्य स्वर चल रहा है और चन्द्र चलाना है तो दाहिना करवट लेट जाओ।
दूसरी विधि -
पुरानी रुई की बत्ती बनाकर नासिका में लगा दो। जो स्वर चलाना हो, उसे ही खुला रखो।
तीसरी विधि -
लेट कर तीसरी पसली के पास तकिया दवा दो। बहुत शीघ्र स्वर बदल जाता है।
चौथी विधि-
एकाएक दौड़ने से या परिश्रम या कसरत करने से भी स्वर बदल जाता है। बीमार को भी इसी नियम का पाबन्द बनावे। बहुत शीघ्र औषधि का सुपरिणाम मालूम होगा और बीमारी भाग जावेगी।
गर्भाधान विधि
इस विषय में विद्या का अभ्यासी अपने और दूसरों के लिए बहुत कुछ कर सकता है। हजारों मनुष्य चाहते हैं कि वे सन्तान का मुख देख सकें। हजारों पूजा-पाठ बैठते हैं। कोई-कोई तो इसी धुन में अपनी प्रतिष्ठा भी खो देते हैं और धन भी गंवाते हैं; परन्तु उनको आशातीत सफलता नहीं होती; किन्तु इसका अभ्यासी इस विषय में बहुत कुछ कर सकता है।